बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और उसके भंडारण को लेकर कोरिया जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है। राज्य सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों और संग्रहण केंद्र की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर 21 नवंबर 2025 की रिपोर्ट में कोरिया जिले के धान संग्रहण केंद्रों में 5,565.95 क्विंटल धान उपलब्ध बताया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि संबंधित संग्रहण केंद्र में धान मौजूद नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल धान उपलब्ध है तो वह वास्तव में कहां है? क्या धान का उठाव हो चुका है, क्या स्टॉक का समायोजन नहीं किया गया या फिर भंडारण के दौरान ही धान गायब हो गया? मामला करीब 1 करोड़ 72 लाख रुपये से अधिक के धान से जुड़ा है।
सरकारी वेबसाइट के आंकड़े खुद बता रहे पूरी कहानी
खाद्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 21 नवंबर 2025 की रिपोर्ट में कोरिया जिले के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 1,19,753.64 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों को प्राप्त हुआ था। इसमें से मिलरों को 11,831.41 क्विंटल और अन्य जारी मद में 1,02,356.28 क्विंटल धान जारी होना दर्ज है। इस तरह कुल 1,14,187.69 क्विंटल धान जारी दिखाया गया है। शेष 5,565.95 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों में उपलब्ध बताया गया है। लेकिन जब सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध इस धान की वास्तविकता पर सवाल उठ रहे हैं और केंद्र में धान मौजूद नहीं होने की बात सामने आ रही है, तब विभाग की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
3100 रुपये क्विंटल के हिसाब से 1.72 करोड़ का धान
यदि सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध बताए गए 5,565.95 क्विंटल धान का मूल्य धान खरीदी की 3,100 रुपये प्रति क्विंटल दर से आंका जाए तो इसकी कुल कीमत 1 करोड़ 72 लाख 54 हजार 445 रुपये होती है। यह कोई छोटी-मोटी प्रशासनिक चूक नहीं है। यदि भौतिक सत्यापन में सरकारी रिकॉर्ड के मुकाबले धान की कमी प्रमाणित होती है तो राज्य सरकार को इतनी बड़ी राशि का आर्थिक नुकसान होने का सवाल खड़ा होगा। आखिर इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या संग्रहण केंद्र के प्रभारी जिम्मेदार होंगे, खाद्य विभाग के अधिकारी जवाबदेह होंगे या फिर धान के उठाव और परिवहन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच होगी?
तत्कालीन जिला प्रशासन के निर्देश पर बदली गई थी व्यवस्था
दरअसल, वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार की नई व्यवस्था के तहत लगभग हर जिले में धान संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए थे। तत्कालीन जिला प्रशासन के निर्देश पर धान खरीदी समितियों से खरीदे गए धान को इन संग्रहण केंद्रों में रखवाया गया था। इसके बाद मिलरों द्वारा यहां से धान का उठाव किया जाना था। इस पूरी व्यवस्था में धान के सुरक्षित भंडारण, रखरखाव, निगरानी और उठाव की जिम्मेदारी तय होना जरूरी था। अब सवाल यह है कि कोरिया में संग्रहण केंद्रों की स्थापना और संचालन का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था? धान को समितियों से हटाकर संग्रहण केंद्रों में रखने के पीछे क्या आधार था? क्या भंडारण के दौरान होने वाली संभावित सूखती और नुकसान का आकलन किया गया था? यदि किया गया था तो उसकी रिपोर्ट कहां है?
समितियों में सूखती पर प्रबंधकों से होती थी वसूली, अब किसकी जवाबदेही?
पहले जब धान खरीदी समितियों में ही धान रखा जाता था, तब सूखती निकलने पर उसकी वसूली समिति प्रबंधकों से किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। यानी समितियों में धान की कमी होने पर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था थी। लेकिन अब जब प्रशासनिक व्यवस्था के तहत धान संग्रहण केंद्रों में रखवाया गया और सरकारी पोर्टल पर हजारों क्विंटल धान उपलब्ध बताया जा रहा है, जबकि केंद्र में वास्तविक स्टॉक नहीं होने की बात सामने आ रही है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या संग्रहण केंद्रों में नियमित भौतिक सत्यापन किया गया था? क्या स्टॉक रजिस्टर का मिलान हुआ था? क्या मिलरों को जारी किए गए धान और उनके वास्तविक उठाव का सत्यापन किया गया?
धान संग्रहण केंद्र खोलने के निर्णय के मुख्य जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले में केवल संग्रहण केंद्र के प्रभारियों की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं होगी। धान को समितियों से संग्रहण केंद्रों तक पहुंचाने, वहां सुरक्षित रखने, निगरानी करने और मिलरों को जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। तत्कालीन जिला प्रशासन के निर्देश, खाद्य विभाग के आदेश, भंडारण रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज, मिलरों को जारी किए गए डीओ और उठाव की पावती का मिलान होना चाहिए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि 21 नवंबर 2025 को सरकारी पोर्टल पर 5,565.95 क्विंटल धान उपलब्ध दर्ज होने के बाद उसका क्या हुआ? यदि धान का उठाव किया गया तो वेबसाइट पर उपलब्ध स्टॉक अपडेट क्यों नहीं हुआ? और यदि उठाव नहीं हुआ तो केंद्र में धान क्यों नहीं है?
सरकार की चुप्पी पर सवाल, जांच और वसूली की मांग
सरकारी विभाग की अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े और संग्रहण केंद्र की वास्तविक स्थिति के बीच सामने आए इस अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब राज्य सरकार और खाद्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कोरिया जिले में 5,565.95 क्विंटल धान का वास्तविक स्टॉक कहां गया। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय की जाए तथा यदि धान की कमी प्रमाणित होती है तो नियमानुसार नुकसान की वसूली की जाए। सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और व्यवस्था पर थी, यदि वहीं धान का हिसाब नहीं मिल रहा है तो आखिर राज्य सरकार के खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

