सोनहत में 14 वर्षीय बालक 48 घंटे लापता रहा — जबलपुर के पास होश आया, किसी तरह बचकर लौट आया, पुलिस की खोजबीन पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Chandrakant Pargir


कोरिया। जिले के सोनहत तहसील के ग्राम मधला का 14 वर्षीय ऋषि कुमार राजेश चक्रधारी, जो 10 दिसंबर की सुबह साइकिल से ब्रेड बेचने बोडार कैलाशपुर गया था, रहस्यमय तरीके से लापता हो गया। परिवार वालों ने पूरे क्षेत्र में घंटों तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

बताया गया कि बालक के घर न लौटने पर परिजन 10 और 11 दिसंबर को सोनहत थाने पहुंचे, लेकिन उन्हें “यही कहीं होगा, मिल जाएगा” कहकर वापस भेज दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों के साथ परिजन ने कड़ा विरोध जताया, तब जाकर 11 दिसंबर की रात सोनहत पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की।

12 दिसंबर को पुलिस ने 50 से अधिक ग्रामीणों को कैलाशपुर चौक में इकट्ठा कर जंगल की ओर खोजबीन के लिए भेजा। ग्रामीणों ने पूरे जंगल की खाक छान डाली, लेकिन किसी तरह का सुराग नहीं मिला। ग्रामीणों ने कई बार कहा कि “बालक यहां नहीं मिलेगा”, लेकिन पुलिस इसी क्षेत्र में खोज जारी रखने पर अड़ी रही।

इधर, परिवार को जो जानकारी मिली, उसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। ग्रामीणों के अनुसार, बाहर से आए टेंट में रहने वाले कुछ लोगों ने 10 दिसंबर को ही बालक को बेहोश कर अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि जबलपुर के पास किसी स्टेशन पर बालक को होश आया, जिसके बाद वह किसी तरह वहां से भाग निकला। भय और सदमे में डूबा ऋषि 12 दिसंबर को मनेंद्रगढ़ पहुंचा, फिर वहां से अपने रिश्तेदार के गांव बंजी पहुँचा और पूरी आपबीती सुनाई। उसके रिश्तेदार ने तुरंत परिवार को सूचना दी।

बंजी से बालक को लेकर परिजन सोनहत की ओर निकल गए है। बालक की मिल जाने की खबर से पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। दो दिन से तनाव और चिंता में डूबे परिवार व ग्रामीण राहत की सांस लेते दिख रहे है। कुछ देर में वो सोनहत पहुंचेंगे।

लेकिन अब ग्रामीणों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज करने में लापरवाही बरती गई, मुसाफिरी दर्ज करने की प्रक्रिया में गंभीर कमियाँ हैं, जिसके कारण बाहर से आने वाले संदिग्ध लोग आसानी से गांवों में घूमते रहते हैं। पुलिस ने बालक को जंगल में खोजने पर जोर दिया, जबकि घटना बाहर से आए लोगों की गतिविधियों से जुड़ी प्रतीत हो रही थी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआत से ही पुलिस सतर्क रहती, तो घटना का रूप इतना गंभीर नहीं होता। अब वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और मुसाफिरी व्यवस्था की कड़ाई से समीक्षा की मांग कर रहे हैं।

क्षेत्र में बालक के सकुशल लौट आने पर राहत है, लेकिन घटना ने सुरक्षा व्यवस्था व पुलिस की तत्परता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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