बैकुंठपुर, कोरिया। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर की मिशन कॉलोनी भट्ठीपारा में वन विभाग की वर्षों पुरानी शासकीय कॉलोनी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब 78 वर्ष पुरानी इस कॉलोनी के शासकीय भवनों को तोड़कर उनकी ईंट, लकड़ी की बल्ली, दरवाजे और चौखट तक निकालकर ले जाने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। हैरानी की बात यह है कि जिस भूमि पर वन विभाग अपना अधिकार और शासकीय भवन होने का दावा कर रहा है, उसी भूमि की रजिस्ट्री होने और उसके बाद पूरी कॉलोनी को तोड़े जाने का आरोप है। वन विभाग अब पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के साथ वन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की तैयारी में है।
मामले की शुरुआत करीब एक वर्ष पहले हुई थी, जब वन विभाग ने संबंधित भूमि पर निजी दावेदारी और अतिक्रमण की आशंका को लेकर एसडीएम बैकुंठपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद एसडीएम द्वारा वन विभाग को स्टे प्रदान किया गया था। इसके बावजूद इसी विवादित भूमि की रजिस्ट्री कर दिए जाने का मामला सामने आया। इसके बाद वन विभाग ने तत्कालीन कलेक्टर को पूरे मामले से अवगत कराते हुए शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम बैकुंठपुर ने संबंधित भूमि की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी थी।
स्टे और खरीदी-बिक्री पर रोक के बीच कैसे हुई रजिस्ट्री?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वन विभाग की शिकायत पर एसडीएम स्तर से स्टे दिया गया था, तब संबंधित भूमि की रजिस्ट्री किस आधार पर और किन दस्तावेजों के जरिए कराई गई? यदि भूमि विवादित थी तो रजिस्ट्री से पहले राजस्व विभाग ने वन विभाग के दावों और शासकीय अभिलेखों का परीक्षण किया था या नहीं? वहीं, बाद में खरीदी-बिक्री पर रोक लगाए जाने के बावजूद भूमि पर निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां कैसे जारी रहीं, यह भी जांच का विषय है।
पूरी कॉलोनी तोड़ने का आरोप, सरकारी संपत्ति भी ले गए
वन विभाग की शिकायत के अनुसार, भूमि की रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति द्वारा विभाग को बिना सूचना दिए कॉलोनी के पुराने शासकीय भवनों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया। आरोप है कि भवनों से लकड़ी की बल्ली, दरवाजे, चौखट और ईंटें निकालकर ले जाई जाने लगीं। यह केवल भूमि पर कब्जे का मामला नहीं, बल्कि यदि भवन शासकीय संपत्ति थे तो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और उसके सामान को हटाने का भी गंभीर प्रकरण बन सकता है।
डीएफओ के स्थानांतरण के बाद ठंडे बस्ते में पड़ा मामला! वापसी पर फिर हुई कार्रवाई की पहल
इस प्रकरण के दौरान वन मंडल कोरिया के तत्कालीन डीएफओ का स्थानांतरण हो गया था। इसके चलते मामला अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। अब डीएफओ के वापस आने के बाद उन्होंने प्रकरण को फिर से संज्ञान में लिया है। वन विभाग ने 29 सितंबर 2026 को वन परिक्षेत्राधिकारी बैकुंठपुर के माध्यम से थाना प्रभारी बैकुंठपुर को पत्र क्रमांक 2933 जारी कर शासकीय भवनों को तोड़े जाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
1948 में बना था भवन, विभागीय कर्मचारी करते थे निवास
वन विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, मिशन कॉलोनी भट्ठीपारा स्थित पुराना परिक्षेत्र कार्यालय भवन एवं परिक्षेत्र लिपिक के लिए निर्मित भवन का निर्माण वर्ष 1948 में हुआ था। यहां वन विभाग के कर्मचारी निवास करते थे और विभाग द्वारा उन्हें भवन आवंटित किए जाते थे। समय-समय पर वन विभाग भवनों की पुताई और मरम्मत भी कराता रहा। भवनों में निवासरत कर्मचारियों द्वारा बिजली और पानी का बिल भी जमा किया जाता था। विभाग का कहना है कि इस प्रकार लंबे समय तक भवन शासकीय उपयोग में रहे हैं।
मौके पर निरीक्षण में मिला मलबा, मजदूरों ने बताई ईंट निकालने की बात
29 सितंबर को संयुक्त वनमंडलाधिकारी बैकुंठपुर, उप प्रबंध संचालक कोरिया और वन परिक्षेत्राधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पुराने शासकीय भवनों को तोड़ा हुआ पाया गया। स्थल पर मलबा और आंशिक समतलीकरण के निशान मिले। मौके पर काम कर रहे मजदूरों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि बैकुंठपुर निवासी एक व्यक्ति ने उन्हें शासकीय भवन की ईंटें निकालने के लिए कहा था। संबंधित व्यक्ति को मौके पर बुलाकर पूछताछ की गई तो उसने जमीन की रजिस्ट्री करीब एक वर्ष पहले कराने की बात कही। एक अन्य व्यक्ति ने भी जमीन पर अपना अधिकार बताया। विभाग द्वारा तैयार मौका पंचनामा में भी इस पूरी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
अब पुलिस और राजस्व विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
वन विभाग अब इस मामले में केवल एफआईआर तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, राजस्व विभाग के सामने भी कई सवाल खड़े हैं। जब वन विभाग पहले ही भूमि को लेकर आपत्ति दर्ज करा चुका था और एसडीएम स्तर पर स्टे की कार्रवाई हुई थी, तब रजिस्ट्री कैसे हुई? बाद में खरीदी-बिक्री पर रोक लगाए जाने के बाद भी शासकीय भवनों को तोड़ने और सामग्री हटाने की गतिविधियां किसके संरक्षण में चलती रहीं? क्या संबंधित भूमि का विधिवत सीमांकन और स्वामित्व सत्यापन हुआ था?
अब इस पूरे मामले में पुलिस की एफआईआर, राजस्व अभिलेखों की जांच और वन विभाग की प्रस्तावित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में शासकीय भूमि और भवनों पर अवैध कब्जे तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जरूरत होगी।


