सात जवानों के भरोसे यातायात व्यवस्था, हादसों पर लगाम के लिए सख्त चेकिंग जरूरी, हाईवे से चौक-चौराहों तक सीमित बल में ड्यूटी, वीआईपी ड्यूटी और कार्यालयीन काम का भी जिम्मा

Chandrakant Pargir


 

बैकुंठपुर। कोरिया जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बीच यातायात व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। शहर और प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था संभालने वाले जवानों की तैनाती को लेकर इनसाइड स्टोरी ने अलग-अलग स्थानों का जायजा लिया। इस दौरान हाईवे पर तीन जवान, कुमार चौक पर दो तथा मधलपारा चौक पर दो जवान ड्यूटी करते नजर आए। इस तरह मौके पर कुल सात जवान यातायात व्यवस्था संभालते दिखाई दिए। हालांकि विभाग के कुछ अन्य जवान कार्यालयीन कार्यों और अन्य ड्यूटी के चलते अलग-अलग समय पर मौके पर मौजूद हो सकते हैं।


सीमित बल के सामने यातायात पुलिस के पास वीआईपी ड्यूटी, कार्यालयीन कार्य, चेकिंग और शहर की यातायात व्यवस्था संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बढ़ते यातायात और लगातार सामने आ रहे हादसों के बीच पर्याप्त संख्या में यातायात बल की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है। जानकारों के मुताबिक शहर के प्रमुख चौराहों और दुर्घटना संभावित स्थानों पर नियमित और पर्याप्त बल की तैनाती से यातायात नियमों का पालन कराने के साथ-साथ दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकता है। विभाग में करीब 70 जवानों की आवश्यकता होने की बात भी सामने आती रही है, जिसकी वास्तविक स्थिति और स्वीकृत बल की विभागीय स्तर पर समीक्षा जरूरी है।




चेकिंग व्यवस्था मजबूत नहीं तो आरोपियों को मिल सकता है फायदा

शहर में कुछ ऐसे प्रमुख स्थान हैं जहां नियमित चेकिंग के लिए पर्याप्त बल की जरूरत महसूस होती है। खरवत चौक और जमगहना चौक जैसे स्थानों पर एक अधिकारी के साथ पर्याप्त जवानों की टीम तैनात हो तो संदिग्ध वाहनों की जांच, नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई और किसी घटना के बाद आरोपियों को रोकने में मदद मिल सकती है। सीमित बल होने की स्थिति में कार्रवाई के दौरान आरोपी के मौके से निकल जाने की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए इन स्थानों पर स्थायी अथवा समयबद्ध चेकिंग व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।


शराब पीकर वाहन चलाना बन रहा बड़ा खतरा

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई सबसे अहम कड़ी हो सकती है। जिले में होने वाली दुर्घटनाओं में नशे में वाहन चलाने की भूमिका की नियमित जांच और आंकड़ों के आधार पर समीक्षा जरूरी है। खासकर शाम और रात के समय शहर के प्रमुख मार्गों पर ब्रेथ एनालाइजर से नियमित जांच की जाए तो नशे में वाहन चलाने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

सिर्फ कार या चारपहिया वाहन ही नहीं, बल्कि दोपहिया वाहन चालक भी नशे की हालत में तेज गति से वाहन चलाते नजर आते हैं। ऐसे मामलों में नियमित चेकिंग के साथ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर वाहन जब्ती जैसी कार्रवाई भी प्रभावी हो सकती है।


क्षमता से अधिक सवारी पर हो अचानक जांच

बसों, पिकअप और अन्य यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती हैं। दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय परिवहन विभाग को नियमित रूप से औचक जांच अभियान चलाने की जरूरत है। वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक का लाइसेंस और निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी की जांच लगातार हो तो बड़े हादसों की आशंका को कम किया जा सकता है।


मोबाइल पर बात करते वाहन चलाना भी गंभीर खतरा

मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए वाहन चलाना दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बन सकता है। कार चालक हो या बाइक सवार, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना अथवा स्क्रीन देखना चालक का ध्यान सड़क से हटा देता है। यातायात पुलिस द्वारा ऐसे मामलों में नियमित कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जाना जरूरी है।


अचानक मोड़ने वाले ऑटो और वाहनों पर भी नियंत्रण जरूरी

बैकुंठपुर शहर में ऑटो चालकों द्वारा अचानक सड़क पर वाहन मोड़ने और कहीं भी सवारी बैठाने-उतारने से यातायात प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी तरह कुछ कार चालक भी बिना इंडिकेटर या पर्याप्त सावधानी के अचानक मोड़ लेते हैं, जिससे पीछे से आने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

बस स्टैंड से निकलने वाली बसों के लिए निर्धारित स्टॉपेज और सवारी चढ़ाने-उतारने की व्यवस्था को भी व्यवस्थित करने की जरूरत है। मुख्य मार्ग पर बसों के लंबे समय तक खड़े रहने से जाम की स्थिति बनती है और यातायात प्रभावित होता है। निर्धारित स्टॉपेज और समयबद्ध यातायात व्यवस्था इस समस्या का समाधान हो सकती है।


दूसरे राज्यों से आने वाली पुरानी बसों की फिटनेस की हो दोबारा जांच


बैकुंठपुर और आसपास के क्षेत्र में दूसरे राज्यों से लाई गई पुरानी बसों के संचालन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ बसों की वास्तविक स्थिति और उनके फिटनेस प्रमाणपत्रों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। यदि किसी वाहन की फिटनेस महज कागजों में दुरुस्त है और सड़क पर उसकी स्थिति खराब है तो वह यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

दूसरे राज्यों से आने वाली पुरानी बसों की फिटनेस, ब्रेक, टायर, लाइट, आपातकालीन दरवाजे और अन्य सुरक्षा उपकरणों की दोबारा जांच के लिए परिवहन विभाग को विशेष अभियान चलाना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता मिलती है तो संबंधित वाहन मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।


दुर्घटनाएं रोकने के लिए सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, पहले से निगरानी जरूरी


लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए जरूरत इस बात की है कि यातायात और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करें। शराब पीकर वाहन चलाने वालों की नियमित जांच, ओवरलोडिंग पर कार्रवाई, मोबाइल इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों की धरपकड़, बसों की फिटनेस जांच और ऑटो-बसों के लिए निर्धारित स्टॉपेज जैसी व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया जाए।

सबसे अहम सवाल पर्याप्त यातायात बल का है। यदि सीमित जवानों के भरोसे शहर की चेकिंग, यातायात नियंत्रण, वीआईपी ड्यूटी और कार्यालयीन कार्य एक साथ चलते रहेंगे तो हर स्थान पर प्रभावी निगरानी मुश्किल होगी। इसलिए यातायात विभाग में उपलब्ध और स्वीकृत बल की समीक्षा कर जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जाए, ताकि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय हादसे को पहले ही रोकने की व्यवस्था मजबूत हो सके।

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