बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम मुरमा स्थित मुरमा जलाशय के डाउन स्ट्रीम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) द्वारा कराए जा रहे सड़क एवं पुलिया निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माण को लेकर बार-बार आपत्ति जताए जाने और बांध की सुरक्षा प्रभावित होने की चेतावनी दिए जाने के बावजूद काम बंद नहीं होने तथा दोबारा निर्माण शुरू किए जाने की बात सामने आ रही है। यदि यह स्थिति सही है तो जलाशय की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
बांध की संरचना से छेड़छाड़, फिल्टर हुआ चोक
जल संसाधन विभाग ने पीएमजीएसवाई को भेजे पत्र में स्पष्ट रूप से बताया था कि सड़क निर्माण के दौरान बांध के टो-ड्रेन और फिल्टर के ऊपर मिट्टी डाल दी गई, जिससे फिल्टर चोक होने की स्थिति बन गई। वहीं बांध के मुख्य नाला बंधान वाले स्थान पर बोल्डर टो को हटाकर पुलिया का निर्माण किया गया। विभाग के अनुसार इससे बांध से निकलने वाले रिसाव के पानी का मार्ग भी बाधित हो गया है।
विभाग ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में मुरमा जलाशय पूर्ण जलभराव स्तर पर है। ऐसी स्थिति में फिल्टर और बोल्डर टो से छेड़छाड़ को सामान्य निर्माण कार्य नहीं माना जा सकता, बल्कि यह बांध की सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है।
तीन दिन में काम हटाने का दिया था आदेश
जुलाई 2026 में जल संसाधन विभाग की ओर से पीएमजीएसवाई को पत्र जारी कर निर्माण कार्य तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए थे। विभाग ने तीन दिवस के भीतर निर्माण हटाने, क्षतिग्रस्त बोल्डर टो को विभागीय मार्गदर्शन में पुनर्निर्मित कराने और बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। पत्र में साफ चेतावनी दी गई थी कि भविष्य में बांध को किसी प्रकार की क्षति होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और उप अभियंता की होगी।
मामला टीएल बैठक में भी उठाया गया था और जल संसाधन विभाग ने पीएमजीएसवाई एसएडीओ को भी मामले से अवगत कराया गया बताया जा रहा है। इसके बावजूद यदि विभागीय आपत्तियों के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहा या दोबारा शुरू किया गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला बन सकता है।
‘बार-बार मना किया, फिर भी शुरू हुआ काम’
स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आ रही है कि जल संसाधन विभाग द्वारा बार-बार निर्माण रोकने के लिए कहा गया, लेकिन इसके बावजूद काम पूरी तरह बंद नहीं हुआ और अब फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जल संसाधन विभाग ने बांध की सुरक्षा को लेकर लिखित चेतावनी जारी कर दी थी, तो उसके बाद भी सड़क और पुलिया निर्माण किसकी अनुमति से जारी रहा? क्या निर्माण एजेंसी ने जलाशय की तकनीकी सुरक्षा से जुड़े विभाग से अनुमति ली थी? यदि अनुमति नहीं ली गई तो जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी?
‘ऐसा ही चलता रहा तो बांध की सुरक्षा पर बड़ा खतरा’
जल संसाधन विभाग ने अपने पत्र में फिल्टर के चोक होने, बोल्डर टो हटाने और रिसाव के पानी का मार्ग बाधित होने से बांध को क्षति की आशंका जताई है। ऐसे में यदि विभाग की चेतावनियों की अनदेखी कर निर्माण जारी रहता है और बांध की मूल संरचना से इसी तरह छेड़छाड़ होती रही, तो भविष्य में गंभीर स्थिति पैदा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह है कि प्रशासन जल संसाधन विभाग की आपत्तियों और चेतावनियों के बाद मौके पर निर्माण कार्य रुकवाता है या नहीं और बांध की क्षतिग्रस्त संरचना को तत्काल दुरुस्त कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


