पेड़ों की कटाई विवाद में राजस्व न्यायालय का आदेश, अनिल शर्मा की शिकायत पर तहसीलदार-पुलिस को कार्रवाई के निर्देश

Chandrakant Pargir


 

बैकुण्ठपुर। महलपारा क्षेत्र में पेड़-पौधों की कटाई को लेकर सामने आए विवाद ने अब राजस्व न्यायालय का रुख कर लिया है। आवेदक अनिल शर्मा की ओर से प्रस्तुत शिकायत और उसके बाद हुई जांच एवं न्यायालयीन कार्यवाही के पश्चात अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैकुण्ठपुर के न्यायालय ने मामले में आदेश पारित करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। न्यायालय की ओर से तहसीलदार बैकुण्ठपुर तथा थाना प्रभारी को आदेश की प्रति भेजकर आदेशानुसार कार्रवाई करते हुए न्यायालय को अवगत कराने कहा गया है। 


पेड़ों की कटाई को लेकर शुरू हुआ विवाद

प्रकरण में आवेदक अनिल शर्मा की ओर से पेड़-पौधों की कटाई को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। शिकायत में पेड़ों और उनकी शाखाओं को काटे जाने को लेकर कार्रवाई की मांग की गई। मामले में जांच के दौरान वन विभाग से संबंधित प्रतिवेदन, पंचनामा और गवाहों के कथन भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे और तर्क न्यायालय के समक्ष रखे गए।


अनावेदक पक्ष ने शिकायत की प्रचलनशीलता पर उठाए सवाल

मामले में अनावेदक पक्ष की ओर से प्रस्तुत लिखित तर्क में आवेदक की शिकायत को विधिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं बताते हुए इसकी प्रचलनशीलता पर आपत्ति जताई गई। तर्क में कहा गया कि पेड़-पौधों की कटाई से संबंधित विषय वन विभाग के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है और इसे उचित फोरम के समक्ष रखा जाना चाहिए था। साथ ही शिकायत को पड़ोसी विवाद से जोड़ते हुए इसके पीछे आपसी बैमनस्य होने का दावा किया गया।


बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचने का भी दावा

अनावेदक पक्ष ने अपने लिखित तर्क में आरोप लगाया कि आवेदक द्वारा बाउंड्रीवाल और मकान से सटाकर लगाए गए पेड़-पौधों की वजह से बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी थी। शाखाओं और डगालों को हटाने का अनुरोध किए जाने के बाद पेड़ों की कटाई कराए जाने की बात भी तर्क में कही गई है। हालांकि, इन दावों और आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।


जांच प्रतिवेदन और पंचनामा पर भी उठे सवाल

प्रकरण में प्रस्तुत लिखित तर्क में वन विभाग की ओर से प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन और पंचनामा की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए। अनावेदक पक्ष ने तर्क दिया कि पंचनामा में शामिल गवाह संबंधित मोहल्ले के निवासी नहीं हैं और जांच के दौरान आवेदक द्वारा जानकारी दिए जाने के आधार पर पंचनामा तैयार किए जाने का उल्लेख है। इसी आधार पर जांच की निष्पक्षता पर आपत्ति दर्ज कराई गई।


गवाहों के कथनों में विरोधाभास का दावा

अनावेदक पक्ष ने न्यायालय में यह भी तर्क रखा कि आवेदक के आवेदन, गवाहों के कथनों, पंचनामा और जांच प्रतिवेदन में कई तथ्यों को लेकर विरोधाभास है। इन्हीं आधारों पर प्रकरण को निरस्त किए जाने की मांग की गई थी। दूसरी ओर, आवेदक अनिल शर्मा की शिकायत के आधार पर मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में आगे बढ़ा और अब न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करनी है।


तहसीलदार और थाना प्रभारी को भेजा गया आदेश

न्यायालय के कार्यालय से जारी पत्र में राजस्व प्रकरण में पारित   की प्रति तहसीलदार बैकुण्ठपुर तथा थाना प्रभारी बैकुण्ठपुर को भेजे जाने का उल्लेख है। दोनों अधिकारियों को पारित आदेश के अनुसार कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब इस मामले में प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।


पेड़ निजी विवाद से कहीं बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा

यह पूरा मामला भले ही दो पक्षों के बीच पेड़-पौधों और बाउंड्रीवाल को लेकर विवाद से जुड़ा हो, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण का बड़ा सवाल भी सामने आता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पुराने और विकसित पेड़ों की संख्या लगातार कम हो रही है। पेड़ वायु को स्वच्छ रखने, गर्मी कम करने, पक्षियों को आश्रय देने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए बाउंड्रीवाल, मकान या अन्य निर्माण से जुड़ी समस्या होने पर सीधे पेड़ काटने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से शाखाओं की छंटाई, संबंधित विभाग की अनुमति और आपसी सहमति जैसे विकल्प अपनाना अधिक उचित होगा।


आदेश के बाद कार्रवाई पर नजर

राजस्व न्यायालय के आदेश के बाद अब संबंधित तहसीलदार और थाना प्रभारी द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर लोगों की नजर है। मामले में लगाए गए आरोपों और बचाव में दिए गए तर्कों के बीच वास्तविक स्थिति जांच और आगे की विधिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल न्यायालय के निर्देश के अनुरूप संबंधित विभागों को कार्रवाई कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

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