बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और यातायात व्यवस्था को लेकर इनसाइड स्टोरी द्वारा प्रकाशित खबर का असर दिखाई देने लगा है। खबर में जिले की यातायात व्यवस्था संभालने वाले सीमित बल और जवानों पर यातायात के साथ अन्य कार्यों की जिम्मेदारी होने का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर ने यातायात शाखा में बल बढ़ाने पर विचार करने की बात कही है।
इनसाइड स्टोरी की पड़ताल में सामने आया था कि यातायात शाखा बैकुण्ठपुर में महज सात जवान यातायात व्यवस्था के साथ-साथ अन्य कार्य भी संभाल रहे हैं। ऐसे में जिले में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं के बीच यातायात व्यवस्था और चेकिंग को प्रभावी बनाने को लेकर सवाल उठ रहे थे। एसपी के स्तर पर बल बढ़ाने पर विचार किए जाने से यातायात व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की उम्मीद है।
66 मामलों में 70,200 रुपये समन शुल्क
यातायात शाखा बैकुण्ठपुर द्वारा 1 सितंबर से 26 अक्टूबर 2026 तक मोटर व्हीकल एक्ट के तहत की गई कार्रवाई के आंकड़े भी सामने आए हैं। इस अवधि में कुल 66 मामलों में 70,200 रुपये का समन शुल्क वसूल किया गया।
आंकड़ों के मुताबिक बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने के पांच मामलों में 2,500 रुपये, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के दो मामलों में 7,000 रुपये, बिना हेलमेट वाहन चलाने के सात मामलों में 3,500 रुपये, मालवाहक वाहन में यात्रियों का परिवहन करने के पांच मामलों में 23,000 रुपये तथा मॉडिफाई साइलेंसर का इस्तेमाल करने के तीन मामलों में 15,000 रुपये का समन शुल्क लगाया गया। वहीं वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करने के छह मामलों में 6,000 रुपये की कार्रवाई की गई। यातायात नियमों का पालन नहीं करने के 44 मामलों में 13,200 रुपये का समन शुल्क वसूला गया।
खबर के बाद बसों की जांच में तेजी
इधर खबर के बाद यातायात विभाग ने बसों और अन्य वाहनों की जांच में भी तेजी दिखाई है। पिछले पांच दिनों में 28 बसों की जांच की गई। इस दौरान बसों की फिटनेस सहित आवश्यक दस्तावेजों और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की गई। बुधवार को जांच के दौरान एक बस का परमिट नहीं पाए जाने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बीच यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच और पर्याप्त बल की जरूरत महसूस की जा रही है। अब देखना होगा कि यातायात शाखा में बल बढ़ाने के निर्णय के साथ-साथ चेकिंग और कार्रवाई का यह अभियान आगे कितनी प्रभावी तरीके से जारी रहता है।


