बैकुंठपुर, कोरिया। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने जा रही है। खरीदी शुरू होने से पहले ही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में धान का स्टॉक जमा करने वाले संभावित बिचौलियों पर प्रशासन की नजर होना जरूरी है। गांव-गांव में निजी स्तर पर धान का भंडारण किया जा रहा है या नहीं, इसकी समय रहते जांच हो तो खरीदी सीजन के दौरान होने वाली संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
धान खरीदी के प्रत्येक सीजन में किसानों के पंजीयन, वास्तविक खेती के रकबे, उत्पादन और खरीदी केंद्रों में पहुंचने वाली धान की मात्रा का आपसी मिलान महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जिला प्रशासन को चाहिए कि वह शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में धान का बड़े पैमाने पर भंडारण करने वाले व्यापारियों, बिचौलियों और अन्य संदिग्ध ठिकानों की पहचान कर नियमानुसार जांच कराए। संबंधित व्यक्तियों के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, किसानों से खरीदी की रसीदें और धान के परिवहन संबंधी अभिलेखों का सत्यापन किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भंडारित धान वैध खरीद से आया है या उसके स्रोत में कोई गड़बड़ी है।
खरीदी शुरू होने से पहले हो भौतिक सत्यापन
प्रशासन के लिए सबसे जरूरी कदम यह होगा कि खरीदी शुरू होने से पहले ही चिन्हित गोदामों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों पर उपलब्ध धान की वास्तविक मात्रा का भौतिक सत्यापन कराया जाए। मौके पर मौजूद स्टॉक का मिलान व्यापारी के दस्तावेजों से किया जाए और जांच में सामने आए अंतर की विधिवत रिपोर्ट तैयार हो। जिन स्थानों पर रिकॉर्ड से अधिक धान मिलता है या खरीद के स्रोत के संबंध में संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिलते, वहां संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।
विशेष रूप से उन मामलों पर निगरानी जरूरी है, जहां निजी व्यापारियों के पास बड़ी मात्रा में धान जमा है और खरीदी सीजन में दूसरे किसानों के पंजीयन या रकबे के माध्यम से धान खपाए जाने की आशंका हो। हालांकि, केवल अधिक स्टॉक मिलना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। इसके लिए धान के स्रोत, खरीद की वैधता और मंडी शुल्क सहित संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी होगी।
मंडी शुल्क चोरी और अवैध खरीदी पर भी रहे नजर
निजी व्यापारियों द्वारा की जाने वाली धान की खरीद-बिक्री पर लागू मंडी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए। जहां मंडी शुल्क देय है, वहां शुल्क भुगतान के अभिलेखों का सत्यापन किया जाए। छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 के लागू प्रावधानों के तहत अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारी वैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं।
जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग, खाद्य विभाग और मंडी अधिकारियों के बीच समन्वय बनाकर जांच की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। इससे खरीदी शुरू होने के बाद अचानक सामने आने वाली शिकायतों के बजाय पहले से ही संदिग्ध स्टॉक की पहचान और निगरानी संभव होगी।
किसानों के हक की रक्षा के लिए जरूरी पहल
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का उद्देश्य वास्तविक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। यदि कोई बिचौलिया अवैध तरीके से धान जमा कर सरकारी खरीदी व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करता है, तो इससे वास्तविक किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए खरीदी शुरू होने से पहले प्रशासन को गांव-गांव में धान के बड़े स्टॉक की जानकारी जुटाकर नियमानुसार भौतिक सत्यापन कराना चाहिए और जहां अनियमितता के प्रमाण मिलें, वहां बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन 15 नवंबर से खरीदी शुरू होने के पहले ही संभावित बिचौलियों के स्टॉक का सत्यापन कराएगा, या खरीदी शुरू होने के बाद ही अनियमितताओं की जांच शुरू होगी? समय रहते की गई निगरानी ही खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

