वन विभाग की 1948 की कॉलोनी पर मालिकाना हक का विवाद, डेविड राबर्ट ने पेश की 1970 की रजिस्ट्री और 1947-48 का मिशल, डेविड प्रकाश राबर्ट बोले- रजिस्ट्री में जमीन के साथ मकान और कुआं भी शामिल, वन विभाग का दावा गलत; एसडीएम ने जर्जर मकान की मरम्मत के लिए अपना स्थगन आदेश किया निरस्त

Chandrakant Pargir


 

बैकुंठपुर, कोरिया। मिशन कॉलोनी भट्ठीपारा स्थित वन विभाग के पुराने शासकीय भवनों को तोड़े जाने और जमीन पर निजी कब्जे के आरोपों के बीच अब दूसरे पक्ष का जवाब भी सामने आया है। डेविड प्रकाश राबर्ट पिता विशप आई.एन. राबर्ट ने इनसाइड स्टोरी के सामने वर्ष 1970 की रजिस्ट्री और वर्ष 1947-48 का मिशल दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए भूमि एवं मकान पर अपना स्वामित्व बताया है। उनका कहना है कि 18 नवंबर 1970 को हुई रजिस्ट्री में केवल जमीन ही नहीं, बल्कि उस पर निर्मित मकान और कुआं भी शामिल था। ऐसे में वन विभाग द्वारा उक्त भूमि और भवन को शासकीय संपत्ति बताना सही नहीं है।


डेविड प्रकाश राबर्ट के अनुसार, उनके परिवार के पास भूमि के स्वामित्व से संबंधित पुराने दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने वर्ष 1947-48 का मिशल भी प्रस्तुत किया है। उनका दावा है कि विवादित भूमि और उस पर बने मकान उनके परिवार की संपत्ति हैं। उन्होंने एसडीएम बैकुंठपुर के न्यायालयीन आदेश का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासन ने भी दस्तावेजों और राजस्व निरीक्षक की जांच रिपोर्ट के आधार पर भूमि को भूमिस्वामी हक में दर्ज पाया है।


एसडीएम ने पहले लगाया था स्थगन, फिर 2 जून 2026 को किया निरस्त

इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैकुंठपुर के न्यायालय का आदेश भी सामने आया है। आदेश के अनुसार, 9 सितंबर 2025 को विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रोकने के लिए स्थगन आदेश जारी किया गया था। इसके बाद डेविड प्रकाश राबर्ट की ओर से स्थगन आदेश हटाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। आवेदन में बताया गया कि उनके मकान की स्थिति जर्जर है और वह कभी भी गिर सकता है। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए मकान की मरम्मत कराने की अनुमति मांगी गई थी।

एसडीएम के आदेश में राजस्व निरीक्षक की जांच रिपोर्ट का उल्लेख है, जिसमें ग्राम बैकुंठपुर स्थित खसरा नंबर 391/1/ख, रकबा 0.2070 हेक्टेयर भूमि डेविड प्रकाश पिता विशप आई.एन. राबर्ट के नाम भूमिस्वामी हक में दर्ज होना बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मौके पर छह आवासीय भवन स्थित हैं, जिनमें से दो भवनों में वन विभाग के कर्मचारी निवासरत हैं, जबकि शेष भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।



 


वन विभाग से मांगे गए दस्तावेज, लेकिन एसडीएम के अनुसार नहीं हुए पेश

एसडीएम के आदेश में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी दर्ज है कि वनमंडलाधिकारी बैकुंठपुर से विवादित भूमि के संबंध में कई बार दस्तावेज मांगे गए थे। कार्यालय के पत्र क्रमांक 1752/वाचक/2026 दिनांक 4 मई 2026 के माध्यम से भी खसरा नंबर 391/1/ख, रकबा 0.2070 हेक्टेयर से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। आदेश के मुताबिक, वनमंडलाधिकारी कार्यालय की ओर से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

इन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए एसडीएम ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान राजस्व अभिलेखों में भूमि भूमिस्वामी हक में दर्ज है तथा भूमि की खरीदी-बिक्री हो चुकी है। स्वामित्व का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसके बाद एसडीएम ने 2 जून 2026 को पूर्व में जारी 9 सितंबर 2025 के स्थगन संबंधी ज्ञापन क्रमांक 3294/वाचक/2025 को निरस्त कर प्रकरण नस्तीबद्ध करने का आदेश दिया।



सितंबर 2025 के पंचनामे में वन विभाग ने दर्ज कराई थी आपत्ति

दूसरी ओर, वन विभाग का पक्ष भी दस्तावेजों में दर्ज है। 4 सितंबर 2025 के मौका पंचनामे के अनुसार, वन विभाग ने मिशन कॉलोनी में कर्मचारियों के आवासीय भवनों को पुराना शासकीय परिसर बताते हुए वहां निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर आपत्ति दर्ज कराई थी। वन विभाग की ओर से बताया गया था कि कॉलोनी में कर्मचारी निवासरत हैं और भवनों की दक्षिणी सीमा पर बिना विभागीय सूचना के बाउंड्रीवाल एवं निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा रहा है।

मौका जांच में राजस्व अभिलेख के आधार पर खसरा नंबर 391/1/ख, रकबा 0.2070 हेक्टेयर भूमि डेविड प्रकाश राबर्ट के नाम भूमिस्वामी हक में दर्ज होने का उल्लेख भी पंचनामे में है। वहीं, मौके पर उपस्थित उनके पुत्र आशीष न्यूटन राबर्ट ने निर्माण कार्य स्वयं कराए जाने की बात कही थी।


अब सवाल- पुराने दस्तावेज और सरकारी उपयोग के बीच किसका है वास्तविक स्वामित्व?


इस पूरे विवाद में अब दो अलग-अलग पक्षों के दस्तावेज और दावे सामने हैं। वन विभाग भवनों को वर्ष 1948 से शासकीय उपयोग में बताते हुए उनके रखरखाव और कर्मचारियों के निवास का हवाला दे रहा है। वहीं, डेविड प्रकाश राबर्ट 18 नवंबर 1970 की रजिस्ट्री और 1947-48 के मिशल के आधार पर भूमि, मकान और कुएं पर पारिवारिक स्वामित्व का दावा कर रहे हैं।

एसडीएम के आदेश में राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में नाम दर्ज होने की बात कही गई है, लेकिन साथ ही स्वामित्व के अंतिम निर्धारण का अधिकार सक्षम न्यायालय को बताया गया है। ऐसे में केवल राजस्व रिकॉर्ड या किसी एक पक्ष के दावे से विवाद का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता।

इधर, वन विभाग ने 29 सितंबर 2026 को शासकीय भवनों को तोड़े जाने और सामग्री हटाए जाने के मामले में बैकुंठपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। विभाग वन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगा कि 1947-48 के मिशल, 1970 की रजिस्ट्री, वर्तमान खसरा-नक्शा, पुराने भवन निर्माण एवं आवंटन अभिलेख और एसडीएम के आदेश का एक साथ परीक्षण किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि विवादित खसरे की सीमा और वन विभाग के पुराने आवासीय भवनों की वास्तविक स्थिति क्या है। जब तक इन दस्तावेजों का मिलान और स्वामित्व का विधिक निर्धारण नहीं होता, तब तक इस विवाद पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

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