बैकुण्ठपुर। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय बैकुण्ठपुर के विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक ने विशेष आपराधिक प्रकरण क्रमांक 36/2025 में आरोपी रामप्रसाद को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह फैसला 30 सितंबर 2026 को सुनाया।
शासन की ओर से पैरवी कर्ता महेश शर्मा विशेष लोक अभियोजक रहे
प्रकरण के अनुसार, घटना 4 नवंबर 2025 की सुबह करीब 9:30 बजे प्रेमाबाग, बैकुण्ठपुर में हुई थी। अभियोजन के मुताबिक आरोपी पीड़िता के घर पहुंचा और उसके भतीजे के बारे में पूछताछ की। घर में पीड़िता को अकेला पाकर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ जबरदस्ती की, विरोध करने पर मारपीट की तथा उसके बाएं हाथ पर काट लिया। घटना के बाद पीड़िता ने थाना अजाक बैकुण्ठपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना के बाद प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने आरोपी रामप्रसाद को धारा 333 बीएनएस में एक वर्ष कठोर कारावास व 2 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 74 बीएनएस में एक वर्ष तीन माह कठोर कारावास व 2 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 118 बीएनएस के तहत छह-छह माह के कठोर कारावास और 500-500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में न्यायालय के निर्णय को पीड़िता के साथ हुई घटना पर न्यायिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

