बैकुंठपुर। नगर पालिका अध्यक्ष की सामान्य सीट ने बैकुंठपुर की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव की तारीख और टिकट की अंतिम तस्वीर भले अभी सामने नहीं आई हो, लेकिन शहर में अध्यक्ष पद को लेकर दावेदारों और उनके समर्थकों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। चौक-चौराहों से लेकर राजनीतिक बैठकों और सोशल मीडिया तक संभावित उम्मीदवारों के नाम चर्चा में हैं।
भाजपा में अब तक कई नाम अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर सामने आ चुके हैं। शारदा प्रसाद गुप्ता ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी रखी है, जबकि हाल ही में अमित श्रीवास्तव ने भी भाजपा के नगरीय निकाय प्रभारी को अपना बायोडाटा सौंपकर अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश की है।
इसके अलावा शैलेश शिवहरे, भानु पाल, अनिल खटीक, पंकज गुप्ता, सीए प्रशांत गुप्ता, आशीष गुप्ता, अनुराग दुबे, सुरेंद्र सिंह छोटू, राहुल खस सहित कई नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं। यानी भाजपा के भीतर टिकट को लेकर मुकाबला बहुकोणीय दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस में लल्ला, डवरे और जायसवाल परिवार की चर्चा
कांग्रेस की स्थिति भी कम दिलचस्प नहीं है। वर्तमान नगर पालिका उपाध्यक्ष आशीष यादव ‘लल्ला’ लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा आशीष डवरे का नाम भी चर्चा में है।
पूर्व अध्यक्ष अशोक जायसवाल को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि वे स्वयं चुनाव मैदान में नहीं उतरते हैं तो उनकी पत्नी साधना जायसवाल का नाम सामने आ सकता है। हालांकि दोनों में से किसी की अंतिम दावेदारी को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसी बीच कांग्रेस के सक्रिय नेता राजीव गुप्ता का नाम भी सोशल मीडिया के जरिए तेजी से चर्चा में आया है। उनके समर्थन में कुछ युवाओं की ओर से अध्यक्ष पद के लिए नाम आगे बढ़ाने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। राजीव गुप्ता लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति और सामाजिक मुद्दों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में उनका नाम सामने आने से कांग्रेस के भीतर दावेदारों का दायरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
ग्राम पंचायत से नगरपालिका तक—दावेदारी की नई चर्चा
चुनाव नजदीक आते ही अब एक और चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। शहर की राजनीतिक चर्चाओं में दावा किया जा रहा है कि कुछ संभावित दावेदार पहले ग्राम पंचायत क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज थे और अब बैकुंठपुर नगरपालिका क्षेत्र में अपना नाम जुड़वाकर अंदरूनी तौर पर अध्यक्ष पद की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि इस तरह की चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। यदि ऐसा कोई मामला है तो मतदाता सूची में नामांतरण और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों से ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से चुनावी मैदान में सक्रिय कुछ नेताओं में नाराजगी की चर्चा भी है।
दावेदार ही नहीं, समर्थकों के गठजोड़ भी शुरू
बैकुंठपुर की चुनावी राजनीति में इस बार एक दिलचस्प तस्वीर यह भी है कि दावेदारों के साथ उनके समर्थक भी सक्रिय होने लगे हैं। टिकट के लिए आवेदन और व्यक्तिगत जनसंपर्क के साथ-साथ संभावित उम्मीदवार एक-दूसरे के समर्थकों से संपर्क साधने में जुटे बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ दावेदार दूसरे संभावित उम्मीदवारों से पहले ही संपर्क कर रहे हैं—यदि टिकट उन्हें नहीं मिला तो भविष्य में समर्थन देने के लिए सहमति बनाई जाए। हालांकि इन चर्चाओं की औपचारिक पुष्टि संबंधित नेताओं की ओर से नहीं हुई है।
पोस्टर से लेकर मैदान तक दिख रही सक्रियता
चुनावी हलचल बढ़ने के साथ नेताओं की सक्रियता भी अलग-अलग अंदाज में दिखाई दे रही है। कुछ दावेदार सामाजिक और सार्वजनिक आयोजनों में लगातार नजर आ रहे हैं, तो कुछ की मौजूदगी फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है।
भाजपा के सीए प्रशांत गुप्ता की सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रियता चर्चा में है। वहीं निर्दलीय पार्षद संजय जायसवाल नगरपालिका और जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते हुए अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए हुए हैं। शारदा गुप्ता और कांग्रेस के आशीष यादव भी विभिन्न सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
इसके अलावा कुछ निर्दलीय पार्षद भी अध्यक्ष पद पर निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी प्रत्याशियों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।
अभी टिकट बाकी, लेकिन चुनावी बिसात बिछने लगी
बैकुंठपुर में फिलहाल असली मुकाबला प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से पहले दावेदारी, जनसंपर्क और संगठन के भीतर समर्थन जुटाने का है। भाजपा में जहां दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस भी ऐसे चेहरे की तलाश में है जिसे पार्टी के भीतर समर्थन के साथ शहर में पर्याप्त राजनीतिक स्वीकार्यता मिल सके।
फिलहाल किसी भी दल ने अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इसलिए आज जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है, जरूरी नहीं कि अंतिम सूची में वही नाम दिखाई दें। चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ तस्वीर साफ होगी।

