रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (SFRTI) रायपुर में सुबबूल (विदेशी प्रजाति) के पेड़ों की कटाई और लकड़ी के निष्पादन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि संस्थान परिसर में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए और लकड़ी निजी व्यक्ति को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के ले जाने दी गई। मामले को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, संस्थान परिसर के करीब 63 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले सुबबूल के पेड़ों को हटाने का कार्य चल रहा है। आरोप है कि लकड़ी ले जाने वाले व्यक्ति से प्रति ट्रैक्टर ₹1500 लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए न तो सार्वजनिक नीलामी कराई गई और न ही किसी टेंडर प्रक्रिया का पालन किया गया। यह भी दावा किया गया है कि संबंधित व्यक्ति के पास केवल आवेदन है, जबकि संस्थान की ओर से कोई औपचारिक लिखित अनुमति उपलब्ध नहीं है।
संस्थान के निदेशक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी कौशलेंद्र कुमार का कहना है कि सुबबूल एक विदेशी आक्रामक (Invasive) प्रजाति है, जो अन्य उपयोगी वृक्षों की वृद्धि में बाधा बन रही थी। इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया गया और इच्छुक व्यक्ति को अपने खर्च पर इसे काटकर ले जाने की अनुमति दी गई। उनका कहना है कि इससे संस्थान को कोई आर्थिक लाभ नहीं हो रहा, बल्कि परिसर की सफाई और प्रबंधन में सुविधा मिल रही है।
हालांकि, वन विभाग के ही कुछ अधिकारियों का कहना है कि शासकीय परिसर में खड़े वृक्षों की कटाई, लकड़ी के परिवहन और उसके निष्पादन के लिए निर्धारित प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। वर्षा ऋतु में कटाई, परिवहन पास (टीपी) तथा अन्य वैधानिक औपचारिकताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
रेंज अधिकारी तीरथ राज साहू ने बताया कि सुबबूल की कटाई पहले भी होती रही है, लेकिन वर्तमान मामले में कटाई और परिवहन से जुड़े दस्तावेज उनके समक्ष उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह कार्य संस्थान के अधिकारियों के निर्देश पर कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी संस्थान परिसर से चंदन की लकड़ी चोरी होने का मामला सामने आया था, जिसकी जांच लंबे समय से लंबित बताई जा रही है। ऐसे में ताजा विवाद के बाद संस्थान की संपत्तियों के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।
अब यह देखना होगा कि वन विभाग इस पूरे मामले की जांच कराता है या नहीं तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।







