बैकुंठपुर/अंबिकापुर। बैकुंठपुर सिटी पीआरएस से रेलवे आरक्षित टिकटों के अवैध कारोबार के मामले में रेलवे सुरक्षा बल की धरपकड़ लगातार जारी है। मामले की परतें खुलने के बाद जांच में सामने आए तथ्यों और डिजिटल लेन-देन के आधार पर आरपीएफ ने शुक्रवार को पांचवें आरोपी सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल (53) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मरियाहू थाना क्षेत्र के सदरगंज गोलाबाजार का निवासी है और वहां राज मोबाइल नामक दुकान संचालित करता है।
आरपीएफ पोस्ट अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 787/2026, धारा 143 रेल अधिनियम की जांच के दौरान निरीक्षक सुनीता मिंज ने सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल से पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि ग्राहक उससे यात्रा संबंधी जानकारी देते थे, जिसे वह संजय कुमार विश्वकर्मा को भेजता था। इसके बाद संजय विश्वकर्मा बैकुंठपुर सिटी पीआरएस में कार्यरत आरोपी अविनाश कुमार सारथी से तत्काल आरक्षित रेलवे टिकट बनवाकर उसे उपलब्ध कराता था।
जांच में यह भी सामने आया कि टिकट किराये के साथ कमीशन की राशि भी PhonePe के माध्यम से भेजी जाती थी। आरोपी के अनुसार संजय विश्वकर्मा को प्रति टिकट/यात्री 800 रुपये तथा अविनाश कुमार को 400 से 450 रुपये तक कमीशन दिया जाता था, जबकि यात्रियों से टिकट किराये के अतिरिक्त करीब 1500 रुपये प्रति यात्री कमीशन लिया जाता था।
हाथ से लिखे PNR वाले टिकट का भी खुलासा
मामले की जांच में 2 अगस्त को इलाहाबाद में टीटीई द्वारा जब्त किए गए उस खाली आरक्षित टिकट का भी उल्लेख सामने आया है, जिस पर पेन से PNR नंबर और अन्य विवरण लिखे गए थे। पूछताछ में सुरेन्द्र ने कथित तौर पर बताया कि यह टिकट भी उसके कहने पर संजय विश्वकर्मा ने बैकुंठपुर सिटी पीआरएस के कर्मचारी अविनाश कुमार से बनवाया था।
वहीं, संजय विश्वकर्मा के कब्जे से जब्त मोबाइल के व्हाट्सएप चैट में मिले 60 तत्काल आरक्षित रेलवे टिकटों, जिनमें 14 टिकटों पर हाथ से PNR नंबर एवं अन्य जानकारी लिखी हुई थी, को लेकर भी आरोपी से पूछताछ की गई। आरोपी ने कथित तौर पर इन टिकटों को भी अपने कहने पर संजय द्वारा अविनाश कुमार से बनवाना स्वीकार किया।
PhonePe लेन-देन बना अहम साक्ष्य
आरपीएफ की जांच में आरोपी के स्वीकारोक्ति बयान के साथ PhonePe लेन-देन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को अहम माना गया है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल को गिरफ्तार कर पूर्व में दर्ज अपराध क्रमांक 787/2026 में संबद्ध किया गया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी बताया कि 17 अगस्त 2026 को आरपीएफ पोस्ट जंघई में उसके और उसके दो कर्मचारियों के खिलाफ भी धारा 143 रेल अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे रेलवे आरक्षित टिकटों के अवैध कारोबार के नेटवर्क के अन्य स्थानों तक जुड़े होने की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
इनसाइड स्टोरी के बाद तेज हुई कार्रवाई
बैकुंठपुर सिटी पीआरएस से तत्काल टिकटों के कथित अवैध कारोबार और खाली टिकटों पर हाथ से PNR लिखे जाने का मामला सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए नाम, मोबाइल में मिले व्हाट्सएप रिकॉर्ड और डिजिटल भुगतान के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब पांचवें आरोपी की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि बैकुंठपुर सिटी पीआरएस से चल रहे इस कथित टिकट नेटवर्क की जड़ें आखिर कितनी दूर तक फैली हैं। आरपीएफ की जांच में आने वाले दिनों में और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

