तीन दिन में मांगा जवाब, 17 दिन बाद भी रजिस्ट्रार मौन, शासकीय भूमि की कथित अवैध रजिस्ट्री मामले में एसडीएम के नोटिस का अब तक जवाब नहीं, कई खसरों की रजिस्ट्री जांच के घेरे में

Chandrakant Pargir


 बैकुण्ठपुर। बैकुण्ठपुर रजिस्ट्रार कार्यालय में शासकीय भूमि की कथित अवैध रजिस्ट्री, नियम विरुद्ध नामांतरण और मुआवजा प्रकरणों को लेकर शुरू हुई प्रशासनिक जांच में अब नया मोड़ सामने आया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैकुण्ठपुर द्वारा उप पंजीयक बैकुण्ठपुर को 4 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में तीन दिवस के भीतर जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी अब तक रजिस्ट्रार की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

मुख्यमंत्री जनदर्शन/पीजी पोर्टल पर महेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा की गई शिकायत के बाद हल्का पटवारियों से कराई गई जांच में कई भूमि संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे। जांच प्रतिवेदनों के आधार पर एसडीएम ने उप पंजीयक को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया शासकीय भूमि के क्रय-विक्रय में शासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया है और मामला जांच का विषय है।


तीन दिन में मांगा था स्पष्टीकरण

एसडीएम कार्यालय से 4 अगस्त को जारी पत्र में उप पंजीयक बैकुण्ठपुर से स्पष्ट रूप से कहा गया था कि संबंधित प्रकरणों में अपना जवाब 03 दिवस के भीतर प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरिया को भी सूचनार्थ भेजी गई थी। लेकिन अब निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रशासन अब अगला कदम क्या उठाएगा।


फूलपुर और शंकरपुर की जमीन पर उठे सवाल

जांच में ग्राम फूलपुर के खसरा नंबर 366 का पुराना नंबर 197/21 दु. पाया गया, जो मिसल खसरा वर्ष 1946-47 में 'बड़े झाड़ का जंगल' मद में दर्ज था। वहीं ग्राम शंकरपुर के खसरा नंबर 157 का पुराना नंबर 1/50 भी मिसल खसरा वर्ष 1945-46 में बड़े झाड़ का जंगल मद में दर्ज मिला था।

इन भूमियों के वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड और बाद में हुए क्रय-विक्रय की प्रक्रिया को लेकर भी जांच प्रतिवेदन में तथ्य दर्ज किए गए हैं। शंकरपुर की भूमि के संबंध में तो वर्ष 2026 में पंजीकृत विक्रय पत्र के आधार पर स्वतः नामांतरण होने का भी उल्लेख किया गया है।


विशुनपुर की भूमि भी जांच के दायरे में

ग्राम विशुनपुर के खसरा नंबर 1045, रकबा 0.61 हेक्टेयर के संबंध में पटवारी जांच रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 1988-89 के मिसल रिकॉर्ड में संतलाल पिता बागरसाय को शासकीय पट्टेदार दर्ज किया गया था, जबकि वर्तमान ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में भूमि अन्य व्यक्ति के नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज है।

चेरवापारा में वन अधिकार का मामला

ग्राम चेरवापारा के खसरा नंबर 139, रकबा 1.40 हेक्टेयर को वर्तमान राजस्व अभिलेख में शासकीय भूमि बताया गया है। कैफियत में वन अधिकार मान्यता पत्रकधारी राजेश कुमार का उल्लेख है। जांच में संबंधित वन अधिकार पत्र प्रस्तुत किए जाने तथा भूमि का क्रय-विक्रय नहीं होने की बात सामने आई है।


कई अन्य खसरे भी नोटिस में शामिल

एसडीएम के पत्र में ग्राम आनी के खसरा नंबर 32, 510 और 933/2, ग्राम बस्ती के खसरा नंबर 103, ग्राम सलका के खसरा नंबर 402/3 सहित अन्य भूमियों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने इन भूमियों से संबंधित रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया और नियमों के पालन की जांच के लिए उप पंजीयक से जवाब मांगा है।


अब आगे की कार्रवाई पर नजर

तीन दिन की समय सीमा में जवाब मांगे जाने के बावजूद जवाब नहीं आने की स्थिति में अब प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्या उप पंजीयक को दोबारा नोटिस जारी होगा, समय सीमा बढ़ाई जाएगी या उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच और कार्रवाई की जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच प्रतिवेदनों में कुछ भूमियों का पुराना रिकॉर्ड जंगल मद अथवा शासकीय पट्टेदार के रूप में दर्ज होने के बावजूद बाद के वर्षों में उनके निजी नामों पर दर्ज होने और कुछ मामलों में पंजीकृत विक्रय होने के तथ्य सामने आए हैं। यदि विस्तृत जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित रजिस्ट्रियों और नामांतरण की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

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