बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय स्थित सिटी रेलवे आरक्षण केंद्र (CT PRS) से तत्काल एवं सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में रेलवे सुरक्षा बल की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि आरक्षण केंद्र में कार्यरत नगर पालिका के संविदा कर्मचारी द्वारा खाली रेलवे टिकट पर पेन से PNR नंबर एवं अन्य जानकारी हाथ से लिखकर टिकट तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन टिकटों को बस के माध्यम से बैकुंठपुर से बनारस भेजा जाता था, जहां उन्हें ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचा जाता था। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
मामला वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, बिलासपुर के निर्देश पर जांच में लिया गया। निरीक्षक सुनीता मिंज ने मामले की जांच शुरू की। जांच की शुरुआत 1 अगस्त 2026 को बैकुंठपुर सिटी PRS काउंटर से जारी एक ऐसे टिकट से हुई, जिस पर पेन से PNR नंबर एवं अन्य विवरण हाथ से लिखे गए थे। यह टिकट इलाहाबाद जंक्शन में जांच के दौरान पकड़ा गया। सिस्टम में PNR की जांच करने पर वह गलत पाया गया। इसके बाद GRP जौनपुर ने टिकट जब्त कर अपराध क्रमांक 22/26, दिनांक 05 अगस्त 2026, धारा 318(4), 319(2) BNS के तहत मामला दर्ज किया।
PRS कर्मचारी की भूमिका आई सामने
जांच में बैकुंठपुर सिटी PRS में कार्यरत नगर पालिका के संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार पिता शंभू सिंह, उम्र 35 वर्ष, निवासी नवापारा सरडी, थाना चरचा, जिला कोरिया की भूमिका सामने आई। पूछताछ में उसके द्वारा कथित तौर पर खाली टिकट पर हाथ से PNR और अन्य जानकारी लिखकर टिकट तैयार करने की बात स्वीकार की गई।
जांच में उत्तर प्रदेश के भदोही निवासी संजय कुमार विश्वकर्मा पिता अमरनाथ विश्वकर्मा, उम्र 48 वर्ष की भूमिका भी सामने आई। आरोप है कि अविनाश कुमार टिकट तैयार कर संजय को बनारस भेजता था। अविनाश ने जांच में कथित तौर पर बताया कि वह बस के माध्यम से टिकट बनारस भेजता था और इसके बदले प्रति व्यक्ति 400 रुपये कमीशन लेता था। वहीं संजय कुमार ने बताया कि वह बनारस में टिकट प्राप्त कर अलग-अलग ग्राहकों को देता था और प्रत्येक व्यक्ति से 600 से 800 रुपये तक अतिरिक्त लाभ कमाता था।
व्हाट्सऐप चैट से 60 टिकटों का खुलासा
जांच के दौरान संजय कुमार के मोबाइल फोन की जांच में व्हाट्सऐप चैट के जरिए 60 तत्काल एवं सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों की जानकारी सामने आई। इनमें 14 टिकट ऐसे मिले, जिन पर PNR नंबर एवं अन्य विवरण हाथ से लिखे गए थे। पूछताछ में अविनाश ने काउंटर से तत्काल टिकट बनाने तथा 14 टिकट हाथ से लिखकर संजय को उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की।
दोनों से रेलवे आरक्षित टिकटों की खरीद-बिक्री के लिए वैध अधिकार पत्र एवं दस्तावेज मांगे गए, लेकिन कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद मोबाइल से 60 टिकटों के स्क्रीनशॉट निकालकर जब्त किए गए। इन टिकटों की कुल कीमत 3 लाख 68 हजार 351 रुपये बताई गई है।
रेल अधिनियम की धारा 143 में हुई गिरफ्तारी
जांच में रेलवे आरक्षित टिकटों को अतिरिक्त रकम लेकर बेचने और अवैध रूप से व्यापार करने की बात सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा बल ने दोनों आरोपियों को रेल अधिनियम की धारा 143 के तहत गिरफ्तार किया। इस संबंध में अपराध क्रमांक 727/26, दिनांक 16 अगस्त 2026 दर्ज किया गया। कार्रवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार आरोपियों को जमानत का लाभ दिया गया।
टिकट पहुंचाने वाला बस चालक भी गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान रेलवे टिकटों को बैकुंठपुर से बनारस तक पहुंचाने वाले साई बाबा बस के चालक रवि शंकर पटेल की भूमिका भी सामने आई। रेलवे सुरक्षा बल ने 17 अगस्त 2026 को रवि शंकर पटेल को गिरफ्तार कर लिया। जांच के अनुसार वह कमीशन के लालच में रेलवे टिकटों को बैकुंठपुर से बनारस तक बस के माध्यम से पहुंचाता था। आरोप है कि उसे जानकारी थी कि टिकटों को अवैध तरीके से दूसरे राज्य में भेजा जा रहा है, इसके बावजूद वह कमीशन लेकर टिकटों को बनारस पहुंचाने का काम करता था।
एक-एक कड़ी जुड़ने से सामने आया नेटवर्क
बैकुंठपुर PRS से टिकट तैयार करने, उन्हें बस के माध्यम से बनारस भेजने और वहां ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचने की पूरी कड़ी अब जांच एजेंसी के सामने आती जा रही है। पहले टिकट के फर्जी पाए जाने से शुरू हुई जांच में मोबाइल चैट के जरिए 60 टिकटों का पता चला और अब टिकटों को दूसरे राज्य तक पहुंचाने वाले बस चालक की गिरफ्तारी से मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ गई है।
रेलवे सुरक्षा बल अब यह जांच कर रहा है कि यह नेटवर्क कितने समय से संचालित था, कितने यात्रियों को इस तरह टिकट उपलब्ध कराए गए और इस अवैध कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।

