बैकुंठपुर। सिटी रेलवे आरक्षण केंद्र (PRS) से रेलवे आरक्षित टिकटों के अवैध कारोबार का मामला सामने आने के बाद अब इसकी परतें लगातार खुलती जा रही हैं। खाली टिकटों पर हाथ से PNR और अन्य जानकारी लिखकर टिकट तैयार करने से लेकर उन्हें दूसरे राज्य में भेजकर अधिक कीमत पर बेचने तक का नेटवर्क सामने आया है। मामले में PRS से जुड़े अविनाश कुमार, बनारस में टिकटों की बिक्री करने वाले संजय कुमार विश्वकर्मा के बाद अब टिकटों को बैकुंठपुर से बनारस पहुंचाने वाले साई बाबा बस सर्विस के चालक रवि शंकर पटेल को भी गिरफ्तार किया गया है। रवि शंकर पिछले करीब 8-9 माह से बस क्रमांक UP-65-JT5673 के माध्यम से बैकुंठपुर से दिए गए रेलवे आरक्षित टिकटों के लिफाफे बनारस पहुंचाता था और प्रत्येक लिफाफे के बदले 200 रुपये कमीशन लेता था। पूछताछ में उसने यह भी स्वीकार किया कि उसे टिकटों के अवैध कारोबार की जानकारी थी, इसके बावजूद कमीशन के लालच में वह टिकट पहुंचाने का काम करता रहा।
इस मामले ने बैकुंठपुर, करंजी, सूरजपुर, विश्रामपुर, अंबिकापुर, चिरमिरी, शिवप्रसाद नगर सहित सरगुजा संभाग के सभी रेलवे आरक्षण केंद्रों की कार्यप्रणाली पर निगरानी की जरूरत को भी सामने ला दिया है। जानकारों के मुताबिक रेलवे आरक्षित टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि लंबे समय से इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल किसी एक आरक्षण केंद्र पर कार्रवाई करने के बजाय संभाग के सभी PRS केंद्रों की नियमित जांच, टिकट बुकिंग के पैटर्न की निगरानी और संदिग्ध यात्रियों अथवा एजेंटों से जुड़े लेनदेन की जांच जरूरी है। विशेष रूप से तत्काल टिकटों की बुकिंग, खाली टिकटों के इस्तेमाल, टिकटों की असामान्य संख्या में बुकिंग तथा एक ही व्यक्ति या नेटवर्क से जुड़े लगातार टिकटों की जांच की जाए तो ऐसे अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है। बैकुंठपुर मामले में सामने आए 60 टिकटों और 3 लाख 68 हजार 351 रुपये के टिकट मूल्य ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि यदि एक केंद्र से इतने बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है तो संभाग के अन्य आरक्षण केंद्रों की भी गहन जांच क्यों न की जाए। रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित विभागों की सक्रिय निगरानी से वर्षों से चल रहे ऐसे संभावित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

