बैकुंठपुर। 11 मई। कोरिया जिले में केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा, ईसी मेंबर दीपक पालीवाल एवं विजय ठाकुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिले के दवा व्यवसायियों और सदस्यों से मुलाकात कर आगामी 20 मई 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बंद को लेकर चर्चा की। बैठक में जिला अध्यक्ष शैलेश गुप्ता, शशांक जिज्ञासी, मयंक गुप्ता, नंद किशोर राजवाड़े सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट्स एवं वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है और इस क्षेत्र से 4 से 5 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। संगठन का आरोप है कि कई बार प्रधानमंत्री एवं संबंधित मंत्रालयों को ज्ञापन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते 20 मई को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद का निर्णय लिया गया है।
संगठन ने अवैध ई-फार्मेसी को सबसे बड़ी चिंता बताते हुए कहा कि बिना उचित नियंत्रण ऑनलाइन दवाओं की बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही है। एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग, फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, एंटीबायोटिक और आदत बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता, गलत तरीके से स्टोर की गई दवाओं का खतरा और एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। संगठन ने कहा कि “दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, यह सीधे मरीज की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।”
बैठक में बड़ी कंपनियों द्वारा भारी डिस्काउंट देकर प्रीडेटरी प्राइसिंग किए जाने का भी मुद्दा उठाया गया। संगठन के अनुसार इससे छोटे केमिस्ट्स का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है और भविष्य में बाजार पर कॉर्पोरेट नियंत्रण की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा GSR 220(E) दिनांक 26 मार्च 2020 एवं GSR 817(E) दिनांक 28 अगस्त 2018 को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि कोविड काल में लागू किए गए नियमों का अब दुरुपयोग हो रहा है और इससे दवा वितरण व्यवस्था कमजोर हो रही है।
AIOCD ने स्पष्ट किया कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 47 का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है। संगठन ने सरकार से अवैध ई-फार्मेसी पर तत्काल रोक, प्रीडेटरी प्राइसिंग पर सख्त नीति तथा छोटे केमिस्ट्स एवं दवा सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
संगठन ने कहा कि वह संवाद चाहता है, टकराव नहीं, लेकिन यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में अनिश्चितकालीन बंद पर भी निर्णय लिया जा सकता है। केमिस्ट्स नेताओं ने कहा कि “अगर देश की दवा वितरण प्रणाली कमजोर होती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम मरीज को होगा।”

