बैकुंठपुर। कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कसरा में मनरेगा के तहत स्वीकृत बसबहरी तालाब गहरीकरण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरिया को लिखित शिकायत सौंपते हुए सरपंच, रोजगार सहायक, सचिव और मेट पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। शिकायत में कई ऐसे आरोप लगाए गए हैं जो मनरेगा की पारदर्शिता और मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
मजदूरों की जगह जेसीबी से कराया जा रहा काम
ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन बसबहरी तालाब गहरीकरण कार्य में मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार तालाब में कई हिस्सों का खुदाई कार्य जेसीबी मशीन से कराया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऐसे कार्य मजदूरों से कराए जाने चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि मशीनों के उपयोग से वास्तविक मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
मौके पर 60 मजदूर, रजिस्टर में 100 की हाजरी !
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप फर्जी हाजरी को लेकर लगाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार तालाब में प्रतिदिन लगभग 60 मजदूर ही काम करते दिखाई देते हैं, लेकिन रोजगार सहायक साधना यादव तथा मेट अजय साहू एवं दुर्गा यादव द्वारा करीब 100 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी नाम जोड़कर सरकारी राशि का आहरण किया जा रहा है। इससे वास्तविक मजदूरों का हक मारा जा रहा है और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है।
पूरा सप्ताह काम, फिर भी आधी हाजरी
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जो मजदूर लगातार 7 दिन काम करते हैं, उनकी हाजरी केवल 3 या 4 दिन ही दर्ज की जाती है। इससे मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं मिल पा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई गरीब मजदूर मजबूरी में विरोध नहीं कर पाते और उन्हें कम भुगतान स्वीकार करना पड़ता है। इससे मजदूरों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
परिवार के लोगों के नाम पर फर्जी भुगतान का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित मेटों द्वारा अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी हाजरी भरकर राशि निकाली जा रही है। शिकायत में कहा गया है कि जिन लोगों ने कभी काम ही नहीं किया, उनके नाम पर भी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान किया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है, जिससे सरकारी राशि का दुरुपयोग हो सके।
12 वर्षीय नाबालिग लड़की के नाम पर भी हाजरी !
मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप एक नाबालिग लड़की के नाम पर फर्जी मजदूरी भुगतान का है। शिकायत में कहा गया है कि 12 वर्षीय के नाम पर भी नियमित हाजरी भरी जा रही है, जबकि वह नाबालिग है और मजदूरी करने नहीं जाती। ग्रामीणों के अनुसार नाबालिग, मेट की सगी बहन है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह बाल श्रम और सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का गंभीर मामला बन सकता है।
तकनीकी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने तकनीकी अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार निरीक्षण करने पहुंचने वाले तकनीकी अधिकारी मौके पर सही तरीके से माप-जोख नहीं करते और न ही फर्जी हाजरी की जांच करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरिया से मांग की है कि बसबहरी तालाब गहरीकरण कार्य की मौके पर जांच कराई जाए, हाजरी रजिस्टर और भुगतान रिकॉर्ड की जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायत में जानकी देवी, पुरन सिंह, राजकुमारी, नर्मदा सिंह, अंजुला सिंह, प्रतिमा और रघुराई सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर बताए गए हैं । मामला सामने आने के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा में भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान का बड़ा मामला साबित हो सकता है।


