भाजपा संगठन की अंदरूनी कलह आई सामने, मुख्यमंत्री के सामने विधायक पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री ने कहा सही जगह बात करेंगे

Chandrakant Pargir

 


बैकुंठपुर। 22 मई 2026। कोरिया जिले की भाजपा राजनीति में सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा। पिछले डेढ़ वर्षों से संगठन के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सार्वजनिक मंच तक पहुंच गई है। भाजपा को हमेशा अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा वाली पार्टी माना जाता रहा है, जहां मतभेदों और नाराजगी को पार्टी फोरम के भीतर ही सुलझाने की परंपरा रही है। लेकिन पहली बार ऐसा देखने को मिला जब पार्टी के ही एक पदाधिकारी ने खुले मंच से मुख्यमंत्री के सामने अपनी ही विधायक पर सवाल खड़े कर दिए।


दरअसल 21 मई 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार कार्यक्रम के तहत सोनहत क्षेत्र के कुशहा पहुंचे थे। करीब चार घंटे के लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की शैली में जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और मांगें सुनने लगे। कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं में अव्यवस्था साफ नजर आई। किसे माइक देना है और किससे बात करानी है, इसे लेकर अधिकारी इधर-उधर दौड़ते दिखाई दिए।



इसी दौरान माइक भाजपा मंडल महामंत्री मनोज साहू तक पहुंच गया। उन्होंने अपना परिचय देते हुए सार्वजनिक रूप से कहा कि भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह अपने क्षेत्र में नहीं आती हैं। यह सुनते ही मुख्यमंत्री स्थिति को समझ गए और तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि “इस बात के लिए यह जगह नहीं है, कहीं और बात करेंगे।”



हालांकि मुख्यमंत्री ने तत्काल मामले को संभाल लिया, लेकिन इस घटनाक्रम ने भाजपा संगठन के भीतर चल रही उथल-पुथल को सार्वजनिक कर दिया। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर एक सिटिंग विधायक के खिलाफ सार्वजनिक मंच से इस तरह बोलने की हिम्मत किसके समर्थन से आई। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इसके पीछे संगठन के किसी बड़े चेहरे का अप्रत्यक्ष समर्थन है या फिर जिला स्तर से लेकर प्रदेश संगठन तक की नाराजगी अंदर ही अंदर बढ़ रही है।



भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए इस तरह का सार्वजनिक विरोध बेहद असामान्य माना जा रहा है। पार्टी के भीतर असहमति के बावजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा मंचीय मर्यादा बनाए रखने की परंपरा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने इस तरह विधायक पर सवाल उठना राजनीतिक रूप से कई संकेत दे रहा है।


जानकारों का कहना है कि पिछले डेढ़ वर्षों में भाजपा संगठन के भीतर सोशल मीडिया पर एकजुटता के संदेश जरूर दिखाई दिए, लेकिन अंदरखाने की गुटबाजी लगातार बढ़ती रही। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी आम है कि कांग्रेस शासनकाल में प्रभावशाली रहे कई चेहरे अब भाजपा सरकार में भी लाभ की स्थिति में हैं, जबकि जमीनी स्तर पर लंबे समय से काम करने वाले कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।



इधर मुख्यमंत्री के सामने उठे इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर विधायक रेणुका सिंह के समर्थन में भी बड़ी संख्या में पोस्ट सामने आने लगे हैं। इससे साफ है कि मामला अब केवल स्थानीय नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील रूप ले चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस पूरे घटनाक्रम का वास्तविक सूत्रधार कौन है और संगठन इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।



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