बैकुंठपुर | 11 मई। कोरिया जिले के चित्तमारपारा स्थित मंगला राइस मिल में कथित धान-चावल घोटाले का मामला तीन साल बाद भी अधर में लटका हुआ है। करोड़ों रुपये की इस अनियमितता में अब तक न तो पूरे मामले का खुलासा हो सका है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कोई बड़ी कार्रवाई हुई है। इससे तत्कालीन जिला प्रशासन की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में बंद पड़ी मंगला राइस मिल के नाम पर पटना धान खरीदी केंद्र समेत दो अन्य केंद्रों से धान उठाव दर्शाया गया था। रिकॉर्ड के मुताबिक राइस मिल द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को कुल 64,320 क्विंटल चावल जमा कराया जाना था, लेकिन 1 नवंबर 2023 तक केवल 289.8 क्विंटल चावल ही जमा होना बताया गया। वर्तमान में भी करीब 64,030.2 क्विंटल चावल जमा होना शेष बताया जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने राइस मिल को सील कर दिया और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन बताया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी जस का तस है कि जब राइस मिल वर्षों से बंद थी, तब आखिर हजारों क्विंटल धान गया कहां?
बंद पड़ी राइस मिल के नाम पर धान उठाव दर्शाने का मामला
64,320 क्विंटल चावल जमा कराने का था रिकॉर्ड
मात्र 289.8 क्विंटल चावल जमा, बाकी हजारों क्विंटल गायब
तीन साल बाद भी जांच अधूरी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं
धान खरीदी केंद्रों और सत्यापन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
एफआईआर के बाद जांच में देरी से आरोपियों को मिली राहत
जिन पर कार्रवाई होनी थी, उन्हें ही फिर जिम्मेदारी देने के आरोप
जिला खाद्य विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में
जांच में ढिलाई के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तत्कालीन जिला प्रशासन ने मामले में सिर्फ दिखावटी कार्रवाई की। जिन समिति कर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, उन्हें पीछे के रास्ते से फिर धान खरीदी प्रभारी बना दिया गया। वहीं एफआईआर दर्ज होने के बाद 90 दिन तक जांच लंबित रहने से आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई।
लोगो का यह भी आरोप है कि तत्कालीन जिला प्रशासन ने जानते हुए कि इस मामले में दो प्रमुख आरोपी इस घोटाले में शामिल है उन्हें पर्दे के पीछे रहकर धान खरीदी करने की विशेष अनुमति दे रखी थी।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि लंबे समय से बंद राइस मिल की जानकारी जिला खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों को आखिर क्यों नहीं थी। यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और यदि जानकारी नहीं थी, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
सिर्फ सीलिंग नहीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल राइस मिल को सील कर देने से सरकार को हुए करोड़ों के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती। मामले में धान खरीदी केंद्र प्रबंधकों, भौतिक सत्यापन करने वाले अधिकारियों और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का दावा करने वाला प्रशासन आखिर इस मामले में इतने वर्षों बाद भी निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया।

