रायपुर। लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ ने अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले और कर्तव्य से विमुख शासकीय सेवकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। संचालनालय द्वारा जारी आदेश में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को ऐसे कर्मचारियों की समीक्षा कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने कहा गया है।
जारी निर्देशों के अनुसार यदि कोई शासकीय सेवक एक माह या उससे अधिक समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है, तो उसकी अनुपस्थिति अवधि को सेवा-व्यवधान माना जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा और उनके विरुद्ध विभागीय जांच कर “दीर्घ शास्ति” की कार्रवाई की जाएगी। आरोप सिद्ध होने पर सेवा से हटाने अथवा पदच्युत करने तक की कार्रवाई संभव होगी।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक अनुपस्थित कर्मचारियों को निलंबित रखना आवश्यक नहीं है, क्योंकि इससे वे निलंबन भत्ते की मांग करते हैं। इसके बजाय सीधे विभागीय जांच और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि एक माह से अधिक अनुपस्थित कर्मचारियों को उनके अंतिम ज्ञात पते पर नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा जाए। यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है, तो उनकी सेवा पुस्तिका में सेवा-व्यवधान दर्ज किया जाएगा, जिससे पेंशन और अन्य लाभ प्रभावित होंगे।
वहीं तीन वर्ष से अधिक समय तक अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2010 के तहत स्वेच्छा से सेवा छोड़ने वाला माना जा सकता है। ऐसे मामलों में सेवा से पदच्युत करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के पालन में लापरवाही बरतने वाले कार्यालय प्रमुखों और पर्यवेक्षक अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। संचालनालय ने सभी जिलों से अनाधिकृत अनुपस्थित कर्मचारियों की समीक्षा रिपोर्ट जल्द भेजने को कहा है।

