बैकुंठपुर में प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे में भारी गड़बड़ी, बारकोड सिस्टम से बढ़ी परेशानी

Chandrakant Pargir

 


बैकुंठपुर। 29 अप्रैल 2026। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में नगर पालिका द्वारा कराए गए प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बारकोड आधारित इस नई व्यवस्था से जहां आम नागरिक परेशान हैं, वहीं टैक्स वसूली में भी नगर पालिका कर्मचारियों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

करीब एक साल पहले रायपुर स्थित डूडा (DUDA) के माध्यम से एक निजी कंपनी को शहर में प्रॉपर्टी सर्वे का कार्य सौंपा गया था। इस सर्वे के तहत ड्रोन कैमरे की मदद से घरों का आकलन कर प्रत्येक मकान पर बारकोड लगाया गया। करीब 6 महीने पहले यह बारकोड सिस्टम लागू भी कर दिया गया, लेकिन शुरुआत से ही इसमें कई तरह की त्रुटियां सामने आ रही हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बारकोड में दर्ज जानकारी पूरी तरह से गलत है। कई घरों में मालिक का नाम उल्टा-सीधा दर्ज किया गया है, तो कहीं ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं जिनका उस संपत्ति से कोई संबंध ही नहीं है। कई मामलों में सही मालिक का नाम ही सिस्टम में मौजूद नहीं है।

सबसे बड़ी गड़बड़ी प्रॉपर्टी टैक्स निर्धारण में सामने आई है। जहां एक मंजिला मकानों का टैक्स अधिक दिखाया जा रहा है, वहीं चार मंजिला भवनों का टैक्स कम आ रहा है। मैनुअल व्यवस्था में जहां किसी संपत्ति पर 16 हजार रुपये तक का कर लगता था, वहीं नई ऑनलाइन प्रणाली में वही टैक्स घटकर मात्र 1600 रुपये दिखाया जा रहा है। कई जगहों पर मकानों को केवल एक मंजिला दर्शाया गया है, जबकि वास्तविकता में वे बहुमंजिला हैं।

ऑनलाइन-ऑफलाइन में अंतर, बढ़ी परेशानी:

नागरिकों का कहना है कि ऑनलाइन टैक्स भरने पर जो राशि दिखाई देती है, वह जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वहीं नगर पालिका कर्मचारियों को भी टैक्स वसूली के दौरान विरोध और असमंजस का सामना करना पड़ रहा है।

एक साल से विरोध, सुधार नहीं:

इस सर्वे में गड़बड़ियों को लेकर बीते एक साल से लगातार विरोध हो रहा है। नगर पालिका द्वारा संबंधित कंपनी को त्रुटियों की जानकारी भी दी गई, लेकिन कंपनी ने किसी भी प्रकार की गलती से इनकार कर दिया। आरोप है कि इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए पिछले एक साल में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।

बारकोड आधारित प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाना था, लेकिन खामियों के चलते यह व्यवस्था अब आम जनता और प्रशासन दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो राजस्व हानि के साथ-साथ जनता का विश्वास भी प्रभावित हो सकता है।

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