चार माह में ही 71 लाख का तहसील भवन जवाब दे गया, दरारों से झांक रही व्यवस्था की पोल, लोक निर्माण विभाग का कारनामा

Chandrakant Pargir

 


बैकुंठपुर।  29 सितंबर 2025 को लोकार्पित किया गया नवीन तहसील भवन अब प्रशासन के लिए ही परेशानी का सबब बन गया है। 71 लाख रुपये की लागत से बने इस दो मंजिला भवन में महज चार माह के भीतर जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित इस भवन की हालत ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। जिस भवन को वर्षों तक उपयोग के लिए बनाया गया था, उसका इतनी जल्दी जर्जर होना आम जनता में भी आक्रोश का कारण बन रहा है।



भवन की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। बिना किसी बारिश के ही निचले तल में पानी टपकने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे छत और पाइपलाइन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि छत पर प्लास्टर किए बिना ही पुताई कर दी गई, जो सीधे-सीधे निर्माण मानकों की अनदेखी को दर्शाता है। खिड़कियों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते वे कुछ ही महीनों में टूटने लगी हैं। वहीं दूसरे तल के कमरों में सीड और नमी फैलने से कर्मचारियों को काम करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।



स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि भवन के निर्माण के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। निर्माण कार्य के समय ही शिकायतें उठी थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। अब हालात यह हैं कि नया भवन होते हुए भी मरम्मत की जरूरत पड़ने लगी है, जिससे सरकारी खजाने पर दोबारा बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।



सबसे गंभीर सवाल जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की जवाबदेही को लेकर खड़े हो रहे हैं। स्पष्ट खामियों के बावजूद न तो संबंधित एसडीओ इंजीनियर पर कोई कार्रवाई की गई है और न ही जिला प्रशासन ने ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया है। घटिया निर्माण कर ठेकेदार का बिना किसी जवाबदेही के निकल जाना, शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब आमजन यह मांग कर रहे हैं कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति रोकी जाए।

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