जिले में धान खरीदी के अंतिम चरण में सबसे संवेदनशील माने जाने वाले खरीदी केंद्र जिल्दा में गड़बड़ियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां खुलेआम एडजस्टमेंट का खेल चल रहा है और किसानों से निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिया जा रहा है। 2024–25 के पुराने बोरों में भरकर लाया गया धान भी धड़ल्ले से खरीदा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह धान सीधे मिलर से खरीदी केंद्र पहुंचता है और फिर औपचारिक खरीदी के बाद वापस उसी मिलर के यहां भेज दिया जाता है।
पूरे खरीदी सीजन के दौरान किसानों से 41 किलो 300 ग्राम तक अतिरिक्त धान लिया गया। जांच के नाम पर कभी-कभार ही अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं और इसी का फायदा उठाकर यह खेल लगातार जारी है। अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों को नियमों के नाम पर परेशान किया गया, लेकिन केंद्र की प्रबंधकीय कार्यप्रणाली पर किसी तरह की सख्ती नहीं दिखाई गई। अब जबकि धान पूरी तरह सूख चुका है और नमी कम होने की कोई गुंजाइश नहीं बची है, उसके बावजूद किसानों से आज भी अधिक धान लिया जा रहा है।
यह सब कुछ केंद्र प्रबंधक की मौजूदगी में हो रहा है, लेकिन सवाल पूछने पर वह अनभिज्ञता जताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी से अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील खरीदी केंद्र पर कब कार्रवाई करता है और किसानों को राहत कब मिलती है।



