नाबालिग चला रहे बाइक-ट्रैक्टर, हादसों का बढ़ता खतरा, अभिभावकों की ढील और प्रशासन की चुप्पी, नाबालिग ड्राइविंग बनी मौत का कारण

Chandrakant Pargir

 


बैकुंठपुर। कोरिया जिले में बुधवार को हुए सड़क हादसे में दो नाबालिगों की मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस घटना ने एक बार फिर नाबालिगों को वाहन सौंपने और उन पर प्रभावी कार्रवाई न होने के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में आमतौर पर नाबालिग तीन से चार लोगों को बैठाकर तेज रफ्तार से बाइक और स्कूटी चलाते हुए नजर आ जाते हैं, जिससे सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही है।

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब नाबालिग ट्रैक्टर जैसे भारी वाहन चलाते पाए जा रहे हैं। खासकर कोरिया जिले में अवैध रेत कारोबार में बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बैकुंठपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नाबालिग ट्रैक्टर चालक इतनी तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं मानो कार चला रहे हों। अचानक मोड़ लेने और लापरवाही के चलते कई बार पीछे आ रहे लोगों के साथ दुर्घटना की स्थिति बन जाती है।



सबसे गंभीर बात यह है कि इन नाबालिग ट्रैक्टर चालकों के पास किसी भी प्रकार का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता और न ही उनकी नियमित जांच होती है। यही कारण है कि वर्षों से नाबालिग इस खतरनाक काम में लगे हुए हैं और प्रशासन की अनदेखी से यह सिलसिला लगातार जारी है।

गांधी नागरिक एकता मंच के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह हादसा पूरे समाज को झकझोर देने वाला है। उन्होंने मांग की कि नाबालिगों द्वारा चलाई जा रही दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो तथा अभिभावक अपने बच्चों को बाइक या स्कूटी न दें।

वहीं मानव अधिकार के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं साहित्यकार शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि इस पूरे मामले में अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर माता-पिता नाबालिग बच्चों को वाहन की चाबी देते ही क्यों हैं। बच्चों की जिद और मनमानी को अनुशासन और सख्ती से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जब तक नाबालिगों की ड्राइविंग पर प्रभावी अंकुश नहीं लगेगा, तब तक दुर्घटनाएं और मौतें नहीं रुकेंगी। उन्होंने यातायात पुलिस से अपील की कि इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता में लिया जाए।

सड़क हादसे में हुई दो मासूम जिंदगियों की मौत ने पूरे जिले को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब भी यदि नाबालिग ड्राइविंग पर सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसे हादसे आगे भी दोहराए जाते रहेंगे।

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