खबर का बड़ा असर- धान खरीदी में लापरवाही: प्रबंधक व दो कर्मचारियों पर कार्रवाई, लेकिन ‘कागजी’ आदेशों के बाद भी पर्दे के पीछे वही चेहरे सक्रिय

Chandrakant Pargir

 


बैकुंठपुर | 16 जनवरी। कोरिया जिले के बैकुंठपुर अंतर्गत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्या पटना (पंजीयन क्रमांक 540) के धान उपार्जन केंद्र में अनियमितताओं के मामले में सहकारिता एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम की जांच के बाद बड़ी कार्रवाई तो हुई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

संयुक्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, कोरिया द्वारा धान खरीदी प्रभारी  नरेन्द्र कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही समिति के अंशकालीन कर्मचारी  राजू सिंह (बारदाना प्रभारी) एवं  राजकुमार (फड़ प्रभारी) को भी धान खरीदी कार्य से पृथक करने के आदेश जारी किए गए हैं।

इसके अलावा धान खरीदी के सुचारू संचालन के लिए लिपिक श्रीमती रेखा जायसवाल को धान खरीदी का प्रभार सौंपा गया है।

कागजों में कार्रवाई, ज़मीनी स्तर पर वही लोग सक्रिय

हालांकि, कार्रवाई के बाद भी हालात पूरी तरह नहीं बदले हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन दो कर्मचारियों को धान खरीदी कार्य से हटाने के आदेश जारी हुए हैं, वही कर्मचारी आज भी अप्रत्यक्ष रूप से पूरे धान खरीदी कार्य को संचालित कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों कर्मचारी समिति के अधिकृत दस्तावेजों में कार्यरत नहीं बताए जा रहे, फिर भी फड़, बारदाना और अन्य अहम व्यवस्थाओं पर इनका नियंत्रण बना हुआ है।



सवालों के घेरे में अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि इन दोनों कर्मचारियों की भूमिका पहले से ही संदिग्ध रही है और धान खरीदी में हुई गड़बड़ियों की असली जिम्मेदारी भी इन्हीं पर थी। बावजूद इसके, प्रबंधक और कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया गया, जबकि मुख्य किरदारों को समिति से पूरी तरह अलग नहीं किया गया।

सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि पूरे मामले में कुछ अधिकारी और समिति से जुड़े लोगों की मिलीभगत सामने आ रही है, जिसकी वजह से आदेश होने के बावजूद वास्तविक बदलाव नहीं हो पा रहा है।

कलेक्टर तक पहुंचा मामला, आगे और कार्रवाई की संभावना

मामले की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरिया, संयुक्त आयुक्त सहकारिता सरगुजा संभाग, जिला विपणन अधिकारी एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को भेजी गई है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उच्च स्तर पर इस पूरे प्रकरण की दोबारा समीक्षा होगी और यदि आरोप सही पाए गए तो आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

धान खरीदी जैसे संवेदनशील कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को देखते हुए अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहेगी या वास्तव में दोषियों को व्यवस्था से बाहर किया जाएगा।

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