सहकारिता विभाग में बड़ी कार्रवाई, तीन आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, 15 दिन में वैधानिक कार्रवाई के निर्देश, नियम विरुद्ध नियुक्ति पर गिरी गाज, तीन प्राधिकृत अधिकारी हटाए गए

Chandrakant Pargir

 


कोरिया। जिले की तीन आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित  विकासखंड बैकुंठपुर से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर तथा संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सरगुजा संभाग अंबिकापुर के आदेश के बाद सहकारिता विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। बड़ी खबर यह है कि  3 प्राधिकृत अधिकारियों को हटा दिया गया है।


समिति में लंबे समय से लंबित चुनाव प्रक्रिया को लेकर अब 15 दिवस के भीतर वैधानिक कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सरगुजा संभाग अंबिकापुर द्वारा दिनांक 30 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय द्वारा WPC 5513/2025 में 17 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है। प्रकरण में याचिकाकर्ता शिव दर्शन सिंह एवं अन्य द्वारा समिति के चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर न्यायालय की शरण ली गई थी।


हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश


उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता द्वारा नवीन अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाए तथा संबंधित प्राधिकारी छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 49(8) के तहत नियमानुसार आवश्यक कदम उठाएं। इसके बाद संयुक्त पंजीयक कार्यालय द्वारा पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की गई।


जांच में सामने आए गंभीर तथ्य


संयुक्त पंजीयक कार्यालय की जांच में यह तथ्य सामने आया कि प्रतिवादी क्रमांक 6  न तो समिति के अंशधारी सदस्य हैं और न ही समिति अथवा बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक चार वर्ष का अनुभव रखते हैं। इसके अलावा विगत पांच वर्षों में समिति की किसी भी वार्षिक सामान्य सभा की बैठक में उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं पाई गई।जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्राधिकृत अधिकारी द्वारा राज्य शासन से किसी प्रकार की छूट या अनुमति से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इन तथ्यों के आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 49(8)(1) के अंतर्गत संस्था का प्राधिकृत अधिकारी मानने योग्य नहीं पाया गया।


चुनाव प्रक्रिया में लापरवाही उजागर


आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अब तक समिति द्वारा राज्य सहकारी निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने संबंधी प्रस्ताव एवं मतदाता सूची तक प्रेषित नहीं की गई, जिसके कारण चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं हो सकी। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है।



15 दिन में कार्रवाई के निर्देश


इन परिस्थितियों को देखते हुए सहायक पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, जिला कोरिया (प्रतिवादी क्रमांक 3) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार अंतर्गत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जामपारा, सरभोंका और एक समिति में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई करते हुए 15 दिवस के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करें।



नियम विरुद्ध नियुक्ति पर गिरी गाज


उच्च न्यायालय एवं संयुक्त पंजीयक के आदेश के अनुपालन में सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, बैकुंठपुर द्वारा दिनांक 08 जनवरी 2026 को संशोधित आदेश जारी करते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई। आदेश के अनुसार, समिति में पूर्व में नियुक्त अशासकीय व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के पद से हटा दिया गया है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उक्त तीनों व्यक्ति छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 49(8) के तहत आवश्यक अहर्ताएं धारण नहीं करते थे, इसके बावजूद उन्हें बोर्ड की शक्तियां सौंपी गई थीं, जो पूर्णतः नियम विरुद्ध था।

नए प्राधिकृत अधिकारी की नियुक्ति को पद से पृथक करते हुए उनके स्थान पर तीन अधिकरियों को  सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है 



तीन प्राधिकृत अधिकारी हटाए गए


इस कार्रवाई के साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि जिले में नियमों की अनदेखी कर की गई कई नियुक्तियों पर अब गाज गिरनी शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, अब तक तीन प्राधिकृत अधिकारियों को हटाया जा चुका है, जिससे शेष ऐसे प्रकरणों पर भी वैधानिक कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।


आदिवासी नेता के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई


गौरतलब है कि ठीक एक दिन पूर्व आदिवासी नेता रमेश टेकाम ने एसडीएम से मुलाकात कर इस मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में हो रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उनके इस हस्तक्षेप के बाद सहकारिता विभाग की सक्रियता बढ़ी और तत्काल प्रभाव से तीन प्राधिकृत अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई।


सहकारिता व्यवस्था में संदेश


इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सहकारिता विभाग की इस कार्रवाई को नियमसम्मत व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शेष नियम विरुद्ध नियुक्तियों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और 15 समय-सीमा में चुनाव प्रक्रिया कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाई जाती है।

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