कोरिया जिले में अवैध रेत उत्खनन बेलगाम, खनिज विभाग की उदासीनता से बढ़ रहा काला कारोबार

Chandrakant Pargir

 


कोरिया। कोरिया जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है, जिससे खनिज विभाग और संबंधित प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर रेत की अवैध निकासी की जा रही है, लेकिन अब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है।



जिले के बचरा पोड़ी के आगे ग्राम पंचायत गेजी से गेज नदी के पाट क्षेत्र में लगातार अवैध रेत उत्खनन का काम जोरों पर चल रहा है। यहां से भारी डंपरों में रेत भरकर सूरजपुर और कोरिया जिले के विभिन्न इलाकों में सप्लाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना दर्जनों डंपर रेत लेकर गुजरते हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। इसी तरह चिरमी क्षेत्र में गेज नदी के भीतर मशीनें उतारकर रेत निकाली जा रही है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह और तटों को नुकसान पहुंचने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।




सोनहत क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन का सबसे अधिक दुष्प्रभाव सड़कों पर देखने को मिल रहा है। सोनहत–कछाड़ी मार्ग पर पड़ने वाले नाले से बड़े पैमाने पर रेत की निकाशी की जा रही है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और कई स्थानों पर डामर उखड़कर गिट्टियां बाहर आ चुकी हैं। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां अवैध रेत उत्खनन के साथ-साथ जंगलों से रेत ढुलाई भी बेरोकटोक जारी है।




इसी तरह बैकुंठपुर विकासखंड के डुमरिया गांव स्थित गोबरी नाले से भी अवैध रेत का कारोबार तेज़ी से चल रहा है। सूत्रों के अनुसार रेत कारोबारी रात के समय इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे हैं, ताकि प्रशासनिक निगरानी से बचा जा सके। रातभर ट्रैक्टरों और डंपरों की आवाजाही से ग्रामीणों की नींद तक प्रभावित हो रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से रात्रिकालीन निगरानी या सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।



सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती से नकेल कसने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिलेभर में चल रहे इस अवैध कारोबार से शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण, नदी-नालों और सड़क ढांचे को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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