मनेन्द्रगढ़। कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती केवल लिखने तक सीमित रहने वाली साहित्यकार नहीं हैं, बल्कि वे जो लिखती हैं, उसे अपने जीवन और कर्म में भी उतारती हैं। स्त्री जीवन की कठिनाइयों पर उनकी संवेदनशील लेखनी का विस्तार उनके सामाजिक कार्यों में भी दिखाई देता है। अपनी संस्था चेतना महिला संगठन के माध्यम से वे सब्जी बेचने वाली महिलाओं, घरेलू कामगारों और सफाईकर्मियों को मंच देकर सम्मानित करती रही हैं।
रविवार को शासकीय कन्या महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में क्षेत्र की कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती के प्रकाशित काव्य संग्रह “एक अरसे बाद” का विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उनके साहित्यिक अवदान पर बोलते हुए हसदेव धारा साहित्य व कला मंच के संस्थापक सदस्य मृत्युंजय सोनी ने कहा कि अनामिका चक्रवर्ती अपने आसपास की महिलाओं की घरेलू समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करती हैं और उनके बच्चों के लिए भी कार्यक्रम आयोजित करती हैं, जो उनकी सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था प्राचार्य डॉ. रामकिंकर पाण्डेय ने कहा कि नगर में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का होना अत्यंत आवश्यक है, इससे नगर जीवंत बना रहता है। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें मनुष्य बनाए रखता है। अनामिका चक्रवर्ती एक साहसिक लेखिका हैं, जो समाज के वर्जित माने जाने वाले क्षेत्रों में भी प्रवेश कर स्त्री जीवन की चुनौतियों पर सशक्त रचनाएं प्रस्तुत करती हैं।
कवयित्री अल्पना चक्रवर्ती ने अनामिका चक्रवर्ती पर लिखी अपनी कविता के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और रचनात्मक सहजता को रेखांकित किया। वहीं मंच के अध्यक्ष रितेश श्रीवास्तव ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद प्रकाशित यह संग्रह “एक अरसे बाद” स्त्री जीवन की कठिनाइयों के साथ-साथ अन्य मानवीय संवेदनाओं को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। उन्होंने संग्रह की कविता “पिता मरते नहीं हैं…” का उल्लेख करते हुए उसकी गहराई की सराहना की।
नगर की उभरती कवयित्री इशिता सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में पहली मुलाकात के बाद से उन्हें अनामिका चक्रवर्ती का निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहा है। उन्होंने कविता “एक थका हुआ मन” का पाठ भी किया। युवा कवि उज्जवल सिंह ने कहा कि अनामिका चक्रवर्ती की कविताएं काल्पनिक नहीं होतीं, बल्कि समाज की यथार्थ स्थितियों और रूढ़िवादी सोच पर सीधा प्रहार करती हैं।
वरिष्ठ पत्रकार नयन दत्त ने कहा कि अनामिका चक्रवर्ती की कविताएं वास्तविकता के धरातल से जुड़ी होती हैं। स्त्री और प्रेम उनकी कविताओं के प्रमुख विषय हैं, जिन पर उनकी लेखनी अमिट छाप छोड़ती है। उन्होंने उनकी प्रेम कविताओं की तुलना धर्मवीर भारती के उपन्यास “गुनाहों का देवता” से की।
कवयित्री की सासू मां लक्ष्मी रानी चक्रवर्ती ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि अनामिका के ससुर की हार्दिक इच्छा थी कि उनका नया काव्य संग्रह प्रकाशित हो। उन्होंने अनामिका को एक अच्छी लेखिका के साथ-साथ आदर्श बहू भी बताया।
कार्यक्रम में गायक सरदार हरमहेन्दर सिंह ने कवयित्री की चर्चित कविता “औरतें तुम जाकर कहीं मर क्यों नहीं जाती” को तत्काल धुन में ढालकर गीत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा सेंगर ने की, जिन्होंने शाल और श्रीफल भेंट कर कवयित्री को सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन वीरांगना श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर जयंत चक्रवर्ती, अल्पना चक्रवर्ती, लक्ष्मी रानी चक्रवर्ती, कमला तापस, अधिकारी प्रबीर दत्ता, स्वदेश रथ, हरमहेन्दर खनुजा, गौतम शर्मा, गरिमा श्रीवास्तव, नीलम सोनी, इशिता सिंह, उज्जवल सिंह, बैकुंठपुर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत पारगिर, सुशांत चक्रवर्ती, रितेश श्रीवास्तव, मृत्युंजय सोनी, नरोत्तम शर्मा, संजय सेंगर, सतीश सोनी, पुष्कर तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









