बैकुंठपुर।। कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर परिक्षेत्र का सरकारी वाहन क्रमांक CG 02 F 0071 इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आला अधिकारियों के निर्देश पर यह वाहन अम्बिकापुर भेजा गया था, लेकिन वापसी के दौरान इसकी एक कार से जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में कार को भारी नुकसान हुआ, जिसकी मरम्मत का बिल 1 लाख 57 हजार रुपये बताया जा रहा है। बताया जाता है कि एक नेता के बीच-बचाव के बाद मामला यहीं सिमटा, और अब यह राशि वन विभाग को चुकानी है।
बैकुंठपुर रेंजर भगन राम ने दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी जानकारी डीएफओ को दे दी गई है, लेकिन आगे की प्रक्रिया और भुगतान को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यहीं से सवालों की असली जड़ शुरू होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सरकारी वाहन से यह दुर्घटना हुई, उसका कोई बीमा ही नहीं है। यानी हादसा हुआ तो खर्च खुद उठाइए — और अगर जान चली जाए तो? इस सवाल का जवाब शायद किसी फाइल में भी दर्ज नहीं है।
सरकार एक ओर नियम, पारदर्शिता और ईमानदारी की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर बिना बीमा के सरकारी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। अब सवाल यह है कि कोरिया वन मंडल के तथाकथित “ईमानदार अधिकारी” 1 लाख 57 हजार रुपये का भुगतान आखिर कैसे करेंगे? क्या जेब से देंगे, या फिर किसी योजना की राशि को इधर-उधर कर इसकी भरपाई की जाएगी? क्योंकि ऐसी दुर्घटनाओं के लिए सरकार ने कोई स्पष्ट नियत प्रावधान तो बना ही नहीं रखा है।
यह मामला सिर्फ एक वाहन दुर्घटना का नहीं, बल्कि सिस्टम की उस लापरवाही का आईना है, जहां जिम्मेदारी तय नहीं होती और बोझ नीचे तक सरकता चला जाता है। आज बात सिर्फ पैसों की है, लेकिन अगर कल किसी की जान चली जाए, तो क्या तब भी यही कहा जाएगा — “जानकारी ऊपर दे दी गई है, बाकी मुझे नहीं पता”?

