कोरिया जिले में धान खरीदी जारी है, लेकिन जिले के सीमावर्ती धान खरीदी केंद्रों पर हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। कोरिया–कोरबा जिले की सीमा पर स्थित बड़े कलुआ और बैमा धान खरीदी केंद्रों पर समिति प्रभारियों की मनमानी खुलकर सामने आ रही है। जिले स्तर के अधिकारियों के निरीक्षण से दूर इन केंद्रों पर भोले-भाले किसानों से खुलेआम अतिरिक्त धान भरवाया जा रहा है। किसान सीधे बोरा नए बोरे में पलटी कर रहे है जबकि ऐसा नही करना है।
इनसाइड स्टोरी की टीम जब बड़े कलुआ धान खरीदी केंद्र पहुंची तो चौंकाने वाले दृश्य सामने आए। यहां किसानों से ही बोरा पलटवाया जा रहा था, वही बोरा भर रहे थे, सीलिंग कर रहे थे और ऊपर छल्ली लगाते भी किसान ही दिखाई दिए। हम्मालों के नाम पर कोई मौजूद नहीं था। किसानों द्वारा भरे और सिले गए बोरो का जब तौल किया गया तो वजन 41 किलो 400 ग्राम से लेकर 41 किलो 800 ग्राम तक पाया गया, जबकि नियमानुसार प्रति बोरा धान का वजन इससे कम होना चाहिए।
ग्रामीणों ने बताया कि समिति प्रभारी रोजाना मुश्किल से एक-दो घंटे ही केंद्र पर आता है, शेष सारा काम अन्य कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रभारी की “लंबी पहुंच” के चलते कोई भी जिला स्तरीय अधिकारी इस खरीदी केंद्र को लेकर सख्ती नहीं दिखाता, यही कारण है कि अब तक यहां निरीक्षण के लिए कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
किसानों से जब बोरे में धान भरने की निर्धारित मात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें 41 किलो धान भरने की जानकारी दी गई है। यानि शुरुआत से ही किसानों को 40 किलो 800 ग्राम के बजाय 41 किलो 800 ग्राम भरने के लिए कहा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह अब तक 70 प्रतिशत से अधिक धान खरीदी हो चुकी है और हर बोरे में किसानों से अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। ऐसा ही हाल बैमा का भी है।
सीमावर्ती खरीदी केंद्रों पर हो रही इस गड़बड़ी ने प्रशासनिक निगरानी और समिति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।




