बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरिया जिले में हुई संयुक्त भर्ती कार्यक्रम–2012 से जुड़े बहुचर्चित मामले में राज्य सरकार की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व में पारित आदेश में न तो कोई त्रुटि है और न ही ऐसा कोई आधार प्रस्तुत किया गया है, जिसके चलते आदेश की समीक्षा आवश्यक हो। अदालत ने कहा कि राज्य समीक्षा की आड़ में पूरे मामले की पुनः सुनवाई चाहता है, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
राज्य सरकार ने याचिका में दावा किया था कि वर्ष 2013–14 में चपरासी/चौकीदार के सभी 526 पद पहले ही भर लिए गए थे और कोई रिक्ति नहीं है। साथ ही समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि 37 अभ्यर्थियों ने कथित रूप से अनुचित साधनों का सहारा लिया था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सभी तथ्य पहले भी उपलब्ध थे, फिर भी ये आधार समय पर नहीं उठाए गए, इसलिए इन्हें अब समीक्षा का कारण नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि समिति की पूर्व रिपोर्ट वर्ष 2014 में ही रद्द की जा चुकी है और चयन प्रक्रिया पर पहले से दिए आदेश अंतिम हैं।
इधर अवमानना मामले में भी अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया है कि वे अगले आदेश तक न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा 28 नवंबर 2025 को व्यक्तिगत उपस्थित होना पड़ेगा। न्यायालय के ताजा आदेश से संयुक्त भर्ती–2012 के अभ्यर्थियों की उम्मीदें एक बार फिर मजबूत हुई हैं, क्योंकि अदालत ने साफ कर दिया है कि राज्य अब इस मामले में पीछे हटने या प्रक्रिया बदलने का अधिकार नहीं रखता।


