बैकुंठपुर।
कोरिया वन मंडल के अंतर्गत आने वाले बहालपुर क्षेत्र में एक बार फिर अवैध रेत उत्खनन का धंधा जोरों पर है। प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टरों में रेत भरकर पहाड़ी रास्तों से होकर चिरमिरी, मनेंद्रगढ़ और बैकुंठपुर तक पहुंचाई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह रेत बिना अनुमति के खुलेआम बेची जा रही है, जिससे न केवल राजस्व की हानि हो रही है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अवैध रेत उत्खनन रात के अंधेरे में और कई बार दिनदहाड़े भी किया जा रहा है। इस कारण वन क्षेत्र की सतह, नालों और पहाड़ी ढलानों का स्वरूप बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार ट्रैक्टरों की आवाजाही से वन क्षेत्र में सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं और धूल व प्रदूषण से आसपास के गांवों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
जानकारों का कहना है कि तत्कालीन डीएफओ प्रभाकर खलखो के कार्यकाल में अवैध रेत कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाती थी। वे स्वयं मौके पर जाकर कार्रवाई करती थीं, जिससे रेत माफियाओं में भय बना रहता था। मगर वर्तमान नवपदस्थ डीएफओ की निष्क्रियता और सुस्त कार्यशैली से अब रेत माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी कार्यालय से घर और घर से कार्यालय तक सीमित रहते हैं, जिसके चलते न तो क्षेत्र का निरीक्षण होता है और न ही अवैध उत्खनन पर नियंत्रण। उनका कहना है कि वन विभाग और प्रशासन की मौन भूमिका ने माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन व उच्चाधिकारियों से तुरंत जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में बहालपुर का पूरा वन क्षेत्र क्षतिग्रस्त हो जाएगा और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।



