ओदरहिया-बगई गढ़ा जंगल में फिर बढ़ा अतिक्रमण, ग्रामीणों ने लगाई डीएफओ से गुहार, चिल्का गांव के लोगों पर पेड़ काटकर खेती करने का आरोप, सरईगहना के ग्रामीण बोले – हमारा निस्तार जंगल खतरे में

Chandrakant Pargir




बैकुंठपुर। कोरिया जिले के बैकुंठपुर वनमंडल के अंतर्गत आने वाले ओदरहिया और बगई गढ़ा जंगल में अवैध अतिक्रमण का मामला एक बार फिर गरमा गया है। ग्राम सरईगहना के ग्रामीणों ने वनमंडलाधिकारी (DFO) को आवेदन देकर तत्काल कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम चिल्का के दो व्यक्ति जंगल की जमीन पर कब्जा जमाकर खेती कर रहे हैं, और बार-बार मना करने के बावजूद वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

 


ग्रामीणों ने बताया कि ओदरहिया जंगल क्षेत्र में लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है। स्थिति यह है कि अतिक्रमणकारियों ने खेती के लिए जमीन समतल करने का काम भी शुरू कर दिया है। बताया गया कि वन विभाग के कर्मचारियों और सरईगहना गांव के लोगों ने मौके पर जाकर कई बार समझाइश दी, लेकिन वे नहीं माने। ग्रामीणों का कहना है कि एक बार उनका अवैध घर JCB से तोड़ा भी गया, फिर भी वे दोबारा जंगल में कब्जा कर खेती कर रहे हैं।


ग्राम पंचायत सरईगहना का कहना है कि संबंधित जंगल ग्राम सरईगहना की सीमाओं में आता है, और यहां के ग्रामीणों का निस्तार (लकड़ी, चारा, इंधन आदि) इसी जंगल से होता है। ऐसे में बाहरी लोगों द्वारा कब्जा किया जाना न केवल अवैध है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।


ग्रामीणों ने कहा कि जंगल की जमीन पर खेती करना वन अधिनियम का खुला उल्लंघन है। बावजूद इसके विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि अतिक्रमण करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लग सके।


ग्रामवासियों ने यह भी कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग द्वारा जांच की तैयारी की जा रही है।



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