कोरिया। जिले की नगर पालिका चुनाव की तैयारियों के साथ ही बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है। इस बार खास बात यह है कि अध्यक्ष पद की दावेदारी के साथ-साथ वार्ड पार्षद पद के संभावित प्रत्याशियों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा और हलचल दिखाई दे रही है।
वार्डों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद अलग-अलग वार्डों में दावेदार सक्रिय हो गए हैं। कई नए चेहरे पहली बार चुनावी राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। राजनीतिक दलों से टिकट की उम्मीद लगाए दावेदारों के बीच अभी से संपर्क और जनसंपर्क का दौर शुरू हो गया है। वहीं कुछ दावेदारों ने संकेत दिए हैं कि पार्टी से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी मैदान में उतर सकते हैं।
शिवपुर-चरचा में अध्यक्ष पद के लिए परिवार की दावेदारी
शिवपुर-चरचा में अध्यक्ष पद की राजनीति भी दिलचस्प होती जा रही है। यहां कांग्रेस और भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं ने अपनी अपनी पत्नि को अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए आगे किया है। वहीं बैकुंठपुर में भी दोनों प्रमुख दलों के संभावित दावेदार सक्रिय नजर आने लगे हैं।
भाजपा की ओर से शारदा गुप्ता द्वारा दावेदारी का पत्र दिए जाने के बाद अब कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों से दावेदारी के पत्र सामने आने लगे हैं। हालांकि पार्टी के कुछ प्रमुख दावेदारों ने अभी तक औपचारिक रूप से दावेदारी पत्र नहीं दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।
वार्ड 15 में सबसे ज्यादा हलचल
बैकुंठपुर नगर पालिका का वार्ड क्रमांक 15 इस समय पार्षद पद की दावेदारी को लेकर खासा चर्चित है। यहां करीब 12 से 13 संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। इनमें से कांग्रेस और भाजपा को अंततः एक-एक प्रत्याशी का चयन करना होगा।
दिलचस्प बात यह है कि टिकट की दौड़ में शामिल कई दावेदार अभी से मैदान में सक्रिय हैं। एक दावेदार ने तो अपना पोस्टर भी लगवा दिया है। टिकट नहीं मिलने की स्थिति में भी कुछ दावेदार चुनाव मैदान नहीं छोड़ने की बात कह रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ दावेदारों की संख्या कम हो सकती है और दोनों प्रमुख दलों में समझाइश, आपसी सहमति अथवा संगठन स्तर पर प्रबंधन के जरिए कई दावेदारों को एक नाम पर सहमत करने का प्रयास होगा।
प्रत्याशियों की संख्या बढ़ी तो मुकाबले का गणित भी बदलेगा
वार्डों में बड़ी संख्या में निर्दलीय या बागी प्रत्याशियों के मैदान में आने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। स्थानीय चुनावी जानकारों के अनुसार, जब किसी वार्ड में प्रत्याशियों की संख्या अधिक होती है तो मतों का विभाजन कई उम्मीदवारों के बीच हो सकता है। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के सामने भी अपने पक्ष में मतों को एकजुट करने की चुनौती रहती है।
यही वजह है कि इस बार दोनों नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद के साथ-साथ वार्डवार दावेदारों की सक्रियता राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
टिकट से पहले ही शुरू हुआ सर्वे
इधर कांग्रेस और भाजपा के स्तर पर संभावित प्रत्याशियों को लेकर अंदरूनी स्तर पर जानकारी जुटाने की कवायद शुरू होने की चर्चा है। दोनों दल अपने-अपने स्तर पर संभावित उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, स्थानीय संपर्क और वार्ड की राजनीतिक स्थिति को समझने में जुटे हैं।
इसके अलावा चुनाव में रुचि रखने वाले कुछ स्थानीय लोग भी बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा में वार्डवार राजनीतिक माहौल को लेकर अपने स्तर पर जानकारी जुटा रहे हैं। भाजपा से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र के कुछ नेता शहर में लोगों से संपर्क कर स्थानीय माहौल और संभावित प्रत्याशियों को लेकर प्रतिक्रिया जानने में लगे हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में भी अंदरूनी स्तर पर सर्वे की चर्चा है।
फिलहाल चुनावी तस्वीर शुरुआती दौर में है। अध्यक्ष पद के दावेदारों से लेकर वार्ड पार्षद के संभावित प्रत्याशियों तक, दोनों नगर पालिकाओं में टिकट की दौड़ शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में पार्टी स्तर पर दावेदारियों, सर्वे और संगठन की बैठकों के बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी होंगे और कौन टिकट से बाहर होने के बाद निर्दलीय रास्ता अपनाते हैं।

