हाथियों के कहर से तीन आदिवासी परिवार बेघर, आप ने विधायक और प्रशासन को घेरा, तीन मकान तोड़े, फसलें बर्बाद; पीड़ितों तक मदद नहीं पहुंचने का आरोप, 24 घंटे में राहत नहीं मिली तो आंदोलन की चेतावनी

Chandrakant Pargir

 

एमसीबी/भरतपुर। भरतपुर क्षेत्र में हाथियों के आतंक से तीन गरीब आदिवासी परिवारों के आशियाने उजड़ने का मामला सामने आया है। पार्क परिक्षेत्र जनकपुर के थोड़गी गांव के हथवारी पारा में 3 सितंबर को हाथियों ने तीन मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि घटना के कई दिन बाद भी वन विभाग और प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को अपेक्षित राहत नहीं मिली है।




आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष सुखमंती सिंह, कोरबा लोकसभा अध्यक्ष रमाशंकर मिश्रा और मीडिया प्रभारी मनमोहन सांधे ने गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी स्थिति का जायजा लिया। आप नेताओं ने वन विभाग के अधिकारियों से फोन पर चर्चा कर पीड़ितों को तत्काल तिरपाल, राशन, वैकल्पिक आवास और फसल क्षति का मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की।




विधायक की अनुपस्थिति पर भी उठाए सवाल

आप नेताओं ने क्षेत्र की विधायक की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष सुखमंती सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि संकट के समय प्रभावित परिवारों के बीच नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों के आतंक से गरीब आदिवासी परिवारों के घर उजड़ गए हैं और उन्हें तत्काल सरकारी सहायता की जरूरत है।



कोरबा लोकसभा अध्यक्ष रमाशंकर मिश्रा ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर प्रभावित परिवारों को तिरपाल, राशन, रहने की वैकल्पिक व्यवस्था और फसल क्षति का मुआवजा नहीं दिया गया तो आम आदमी पार्टी वन विभाग और कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर आंदोलन करेगी। मीडिया प्रभारी मनमोहन सांधे ने प्रशासन की कथित उदासीनता को अमानवीय बताते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने की मांग की।




आप नेताओं ने कहा कि भरतपुर की जनता यह जानना चाहती है कि संकट की इस घड़ी में उनकी विधायक कहां हैं। वहीं दूसरी ओर, मामले में प्रशासन और वन विभाग की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत एवं क्षतिपूर्ति के लिए क्या कार्रवाई की गई है, इसे लेकर आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।

 

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