बैकुंठपुर/ रायपुर। कोरिया जिले का नौगई के बहुचर्चित और जघन्य तिहरे हत्याकांड की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मामले में लंबी और विस्तृत विवेचना के बाद 11 आरोपियों के खिलाफ चालान रायपुर स्थित CBI न्यायालय में 11 सितंबर को पेश कर दिया है। हालांकि मामले की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। चार आरोपियों के संबंध में विवेचना जारी बताई जा रही है, जबकि तीन आरोपी अब भी फरार हैं। ऐसे में CBI की आगे की जांच और न्यायालय में पेश किए गए चालान के तथ्यों पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
दर्जनों लोगों से पूछताछ
सूत्रों के अनुसार CBI ने मामले को केवल प्रत्यक्षदर्शियों और नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि घटना की पूरी कड़ी को जोड़ने के लिए कई दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान घटना से पहले और बाद की गतिविधियों, आरोपियों के आपसी संपर्क, वाहनों की आवाजाही और घटनास्थल से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया।
जांच एजेंसी ने घटनाक्रम की प्रत्येक कड़ी को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों पर भी ध्यान दिया। घटनास्थल की जांच के साथ-साथ हत्याकांड में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए वाहनों की भी जांच की गई। सार्वजनिक रिपोर्टिंग में भी CBI टीम द्वारा घटनास्थल पर पहुंचकर बारीकी से जांच किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
वाहनों की जांच में सामने आया चौंकाने वाला तथ्य
मामले की जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए वाहनों की पहचान और उनकी तकनीकी जांच से जुड़ा है।
सूत्रों का दावा है कि जिस टिपर वाहन से फॉर्च्यूनर को कथित तौर पर टक्कर मारकर रोकने और उसके दरवाजों को लॉक करने की स्थिति पैदा की गई थी, उसकी जांच के दौरान वाहन के चेचिस नंबर और वाहन के पंजीयन नंबर में अंतर पाए जाने की जानकारी सामने आई है।
यदि जांच रिकॉर्ड में यह तथ्य प्रमाणित होता है तो यह केवल वाहन की पहचान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाएगा कि उक्त वाहन वास्तविक रूप से किसके नाम पंजीकृत था, मौके पर कौन सा वाहन मौजूद था और घटना में इस्तेमाल वाहन की पहचान किस तरह सुनिश्चित की गई।
हालांकि इस बिंदु पर CBI की ओर से कोई अंतिम सार्वजनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए चेचिस और पंजीयन नंबर में कथित अंतर को फिलहाल जांच से जुड़े सूत्रों की जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
16 जून की उस रात क्या हुआ था?
गौरतलब है कि 16 जून 2026 को नौगई में पूर्व जनपद अध्यक्ष भारत उर्फ लाला सिंह सहित नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह की मौत ने पूरे कोरिया क्षेत्र को झकझोर दिया था। घटना में फॉर्च्यूनर वाहन को कथित रूप से ट्रकों के बीच फंसाकर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की बात सामने आई थी।
घटना की भयावहता को देखते हुए मामले में शुरुआत से ही कई सवाल उठते रहे। घटना में इस्तेमाल वाहनों की भूमिका, मौके पर मौजूद लोगों, घटना से पहले की गतिविधियों और वारदात के बाद आरोपियों की गतिविधियों को लेकर पुलिस जांच के बाद मामला CBI तक पहुंचा।
राज्य सरकार ने 30 जून 2026 को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत CBI को जांच के लिए राज्य में अधिकार क्षेत्र की सहमति प्रदान की थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जांच अपने हाथ में लेकर घटनास्थल और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल शुरू की।
अक्षय त्रिपाठी को अभी क्लीन चिट नहीं
ताजा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अक्षय त्रिपाठी को लेकर बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार घटना के समय अक्षय त्रिपाठी की घटनास्थल पर मौजूदगी नहीं होने की जानकारी जांच में सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे अभी तक CBI की ओर से क्लीन चिट नहीं दी गई है।
इसका मतलब यह है कि जांच एजेंसी उसकी भूमिका से जुड़े पहलुओं को अभी पूरी तरह समाप्त नहीं मान रही है। उसके संबंध में विवेचना जारी बताई जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चालान में उसके संबंध में CBI ने क्या तथ्य और साक्ष्य दर्ज किए हैं तथा आगे की विवेचना किस दिशा में जाती है।
तीन आरोपी अब भी फरार
मामले में तीन आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई है। इन तीनों के संबंध में विवेचना जारी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी भूमिका से जुड़े साक्ष्य भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।
यानी 11 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किए जाने के बावजूद पूरा मामला अभी जांच के स्तर पर समाप्त नहीं हुआ है। चार आरोपियों को लेकर विवेचना जारी है और तीन फरार आरोपियों तक जांच की कड़ियां पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
चालान से सामने आएगा CBI का पूरा जांच नजरिया
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि CBI ने 11 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में पेश किए गए चालान में हत्या की साजिश, आरोपियों की भूमिका, वाहनों के इस्तेमाल, घटनास्थल पर मौजूदगी और तकनीकी साक्ष्यों को किस तरह जोड़ा है।
चार दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ और वाहनों की गहन जांच के बाद तैयार किया गया चालान जांच की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। खासतौर पर उस टिपर के संबंध में सामने आई कथित जानकारी, जिसके चेचिस नंबर और पंजीयन नंबर अलग पाए जाने की बात कही जा रही है, जांच के तकनीकी पहलू को और महत्वपूर्ण बनाती है।
अभी खत्म नहीं हुई कहानी
CBI द्वारा 11 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किए जाने के बाद न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन नौगई हत्याकांड की पूरी तस्वीर अभी सामने आना बाकी है। तीन फरार आरोपी, चार आरोपियों के संबंध में जारी विवेचना और अक्षय त्रिपाठी को क्लीन चिट नहीं मिलने से साफ है कि जांच के कुछ महत्वपूर्ण अध्याय अभी खुले हुए हैं।
अब निगाहें CBI के चालान में दर्ज साक्ष्यों, न्यायालय में होने वाली आगामी कार्यवाही और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर रहेंगी। यदि वाहनों की पहचान और कथित चेचिस नंबर-पंजीयन नंबर के अंतर जैसे तकनीकी तथ्यों की पुष्टि जांच रिकॉर्ड में होती है, तो यह मामला केवल आरोपियों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वारदात की पूरी कड़ी को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


