छत्तीसगढ़ में महिलाओं में तेजी से बढ़ा नशे का ग्राफ, शराब और तंबाकू सेवन में देश में तीसरे नंबर पर राज्य

Chandrakant Pargir


 

विशेष संवाददाता, रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं में नशा करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) की हालिया रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों ने समाज और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में प्रदेश की महिलाओं में तंबाकू और शराब के सेवन में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। शराब पीने के मामले में छत्तीसगढ़ की महिलाएं पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गई हैं।
पड़ोसी राज्यों से बहुत आगे छत्तीसगढ़ की महिलाएं
आंकड़ों की तुलना करें तो छत्तीसगढ़ की महिलाएं नशा करने के मामले में अपने पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से काफी आगे हैं। जहां उत्तर प्रदेश में मात्र 0.3% और मध्य प्रदेश में 1.0% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 5% (यानी हर 100 में से 5 महिलाएं) तक पहुंच चुका है। तंबाकू सेवन के मामले में भी राज्य की 17.3% महिलाएं इसकी आदी हो चुकी हैं, जबकि मध्य प्रदेश में यह दर 10.2% है।
बस्तर और सुकमा में हालात सबसे गंभीर
रिपोर्ट के मुताबिक, पारंपरिक और सामाजिक मान्यताओं के कारण आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह समस्या सबसे विकराल है। सुकमा जिले में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां करीब 32.2% महिलाएं शराब और 44% महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रही हैं। बस्तर संभाग के अन्य जिलों में भी स्थानीय पेय (सल्फी, ताड़ी और महुआ) को सामाजिक रीति-रिवाजों का हिस्सा मानने के कारण महिलाओं में इसकी लत तेजी से फैल रही है।
मंजन के बहाने गुड़ाखू की लत
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में महिलाओं द्वारा दांत साफ करने के नाम पर 'गुड़ाखू' (तंबाकू युक्त पेस्ट) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाएं इसे लत नहीं बल्कि एक आदत मानती हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर को खोखला कर रहा है। इसके अलावा, दिनभर के कड़े शारीरिक श्रम और मानसिक तनाव को मिटाने के लिए भी मजदूरी करने वाली महिलाएं नशे का सहारा ले रही हैं।
कैंसर और गंभीर बीमारियों का खतरा
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि महिलाओं में बढ़ते नशे के कारण ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर), बांझपन, हृदय रोग और असमय गर्भपात जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं इन खतरों से अनजान हैं।
नशा मुक्ति के लिए विशेष प्रयास शुरू
बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए सामाजिक संगठनों और सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत ग्रामीण अंचलों में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही रायपुर और बिलासपुर जैसे प्रमुख शहरों में विशेष रूप से महिलाओं की काउंसलिंग और इलाज के लिए महिला नशा मुक्ति व पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, ताकि प्रभावित महिलाओं को मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।

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