बैकुंठपुर। नगर पालिका बैकुंठपुर में दिसंबर 2026 में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। सामान्य सीट होने के बाद अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक इनसाइड स्टोरी भाजपा से शैलेश शिवहरे, भानु पाल, अनिल खटीक, शारदा प्रसाद गुप्ता, पंकज गुप्ता, सीए प्रशान्त गुप्ता, आशीष गुप्ता,राजेन्द्र सिंह दद्दा, अनुराग दुबे, सुरेन्द्र सिंह छोटू और राहुल खस तथा कांग्रेस से आशीष यादव, अशोक जायसवाल, आशीष डवरे, प्रियांशु जायसवाल और आस्तिक शुक्ला ‘लड्डू’ के नाम सामने ला चुकी है।
इन नामों के सामने आने के बाद अब शहर की सियासत का एक और पहलू सामने आने लगा है। सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावेदारों के समर्थन में पोस्ट और चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इससे यह भी संकेत मिलने लगा है कि किस दावेदार के पीछे कौन सा राजनीतिक या सामाजिक समूह खड़ा हो रहा है। हालांकि अंतिम तस्वीर दोनों दलों द्वारा प्रत्याशी चयन के बाद ही स्पष्ट होगी।
भाजपा में नए नामों ने बढ़ाई हलचल
दावेदारों की मौजूदा सूची के बीच भाजपा खेमे से कुछ ऐसे नाम भी चर्चा में हैं, जिनकी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिसमे वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष गुप्ता, सीए प्रशान्त गुप्ता, अनुराग दुबे और शारदा प्रसाद गुप्ता शामिल है, जिन्हें लेकर थोड़ी हलचल बढ़ी हुई है। अब नए नाम और सामने आ रहे है
कांग्रेस के अंदरखाने कुछ
एक तरफ कांग्रेस के दावेदारों के नाम सामने आ रहे है दूसरी ओर कांग्रेस के अंदरखाने कुछ और ही गणित चल रहा है, कांग्रेस साफ सुथरी निर्विवाद छवि तलाशने में जुटी हुई है, जिससे यह भी लग रहा है कांग्रेस दावेदारों से हटकर अपना उम्मीदवार सामने ला सकती है।
जयनाथ बाजपेयी — सामाजिक पकड़ और निर्विवाद छवि
जयनाथ बाजपेयी का नाम भाजपा के संभावित दावेदारों में चर्चा में आया है। ब्राह्मण समाज में मजबूत पकड़ के साथ उनकी पहचान शहर के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय चेहरे के रूप में रही है। विनम्र व्यवहार और निर्विवाद छवि के चलते उन्हें हर वर्ग में स्वीकार्यता वाला चेहरा माना जाता है।
उनके परिवार का जनसंघ के दौर से ही राजनीतिक विचारधारा से जुड़ाव बताया जाता है। वर्तमान में वे सरकारी सेवा में हैं, लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि पार्टी से अवसर मिलता है तो वे वीआरएस लेकर चुनाव मैदान में उतरने का विकल्प भी चुन सकते हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी भाजपा की अंदरूनी गणित को प्रभावित कर सकती है।
नरेश सोनी — संघ से पुराना रिश्ता, लेकिन दावेदारी से अब तक दूरी
नरेश सोनी का नाम भी भाजपा के संभावित चेहरों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरएसएस से उनका पारिवारिक और बचपन से जुड़ाव रहा है। अविभाजित कोरिया जिले में संघ के महत्वपूर्ण दायित्व पर रहते हुए संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका बताई जाती है।
प्रतिष्ठित व्यवसायी के रूप में पहचान रखने वाले सोनी का पूरा परिवार भाजपा समर्थित माना जाता है। खास बात यह है कि संगठन से लंबे समय से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने कभी पद की लालसा सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई। अब जब अपेक्षाकृत नए चेहरे भी अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं, उनके समर्थक नरेश सोनी को भी इस दौड़ में देखना चाहते हैं। हालांकि स्वयं सोनी की ओर से अब तक सार्वजनिक तौर पर दावेदारी जताने की बात सामने नहीं आई है।
विजय राव — सामाजिक सक्रियता के साथ भाजपा की विचारधारा से जुड़ा चेहरा
विजय राव शहर के सभ्रांत नागरिकों में गिने जाते हैं। धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। शहर के विकास से जुड़े विषयों पर उनके विचारों को भी महत्व दिया जाता रहा है।
वे पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष तीरथ गुप्ता और पूर्व अध्यक्ष शैलेश शिवहरे के करीबी माने जाते हैं। भाजपा की विचारधारा से जुड़े विजय राव अब अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी जता रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर पुराने संबंध और सामाजिक स्वीकार्यता उनकी दावेदारी को कितना मजबूत करते हैं, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।
कांग्रेस में आफताब अहमद ‘छोटका’ ने ठोकी ताल
कांग्रेस खेमे में आफताब अहमद ‘छोटका’ का नाम भी अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार के रूप में सामने आया है। शहर के जिस वार्ड से उनका संबंध है, वहां उनके परिवार के दो सदस्य पार्षद रह चुके हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में कांग्रेस शासन के दौरान उनकी पत्नी को अध्यक्ष बनाने को लेकर भी उनकी सक्रियता चर्चा में रही थी। हालांकि बाद में कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
‘छोटका’ की पहचान वार्ड और शहर में लोगों के बीच सक्रिय रहने वाले व्यक्ति के रूप में है। चाहे मामला पुलिस से जुड़ा हो या किसी अन्य तरह की समस्या से, जरूरतमंद लोगों के बीच उनकी मौजूदगी देखी जाती रही है। यही सक्रियता उनके समर्थकों के बीच उनकी दावेदारी का आधार बन रही है।
इस बार उन्होंने कांग्रेस से अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी जताई है। उनके समर्थकों का दावा है कि यदि कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय स्वयं आफताब अहमद ‘छोटका’ को लेना होगा।
गुलाब गुप्ता - जमीन से जुड़ाव
3 बार पार्षद रह चुके गुलाब गुप्ता भी अध्यक्ष पद के दावेदारों में।पीछे नही है, भाजपा की परिवारिक पृष्ठभूमि के साथ संघ से जुड़ाव है, वार्ड के लोगो के काम के लिए हमेशा खड़े देखे गए है, अब वे पार्षद छोड़ अध्यक्ष के पद की तैयारी में जुटे हुए है, उनका कहना है कि यदि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनातीं है तो उस पर वे खरा उतरेंगे।
दावेदार बढ़े तो बढ़ी गुटबाजी की चर्चा
बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में जिस तरह दावेदारों की संख्या बढ़ रही है, उससे टिकट वितरण दोनों पार्टियों के लिए आसान नहीं रहने वाला है। खासकर सामान्य सीट होने के कारण सामाजिक समीकरण, व्यक्तिगत जनाधार, संगठन में पकड़, पुराने राजनीतिक संबंध और चुनावी खर्च उठाने की क्षमता जैसे कई पहलू टिकट चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल सबसे दिलचस्प बात यह है कि दावेदारों के साथ-साथ उनके समर्थक भी धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। सोशल मीडिया पर चल रही पोस्ट और चर्चाएं आने वाले नगरपालिका चुनाव की अंदरूनी राजनीति की तस्वीर काफी हद तक सामने ला रही हैं।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दावेदार कौन-कौन हैं, बल्कि यह भी है कि किस दावेदार के साथ कितने लोग खड़े हैं और पार्टी संगठन के भीतर किसकी पहुंच कितनी मजबूत है। दिसंबर के चुनाव से पहले बैकुंठपुर की राजनीति में अभी कई और नाम सामने आने की संभावना है।


