बैकुण्ठपुर। रक्षाबंधन का त्योहार आमतौर पर घर-आंगन में भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अपनत्व के साथ मनाया जाता है, लेकिन जिला जेल कोरिया में इस बार यह त्योहार कुछ अलग और भावुक अंदाज में देखने को मिला। जेल में निरुद्ध भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए उत्तर प्रदेश सहित अलग-अलग इलाकों से बहनें पहुंचीं। जेल प्रशासन की ओर से पहली बार रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष व्यवस्था की गई, जिससे जेल की चारदीवारी के बीच भी भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट महसूस हुई।
बहनों के लिए जेल परिसर में बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। इसके लिए सुंदर शामियाना लगाया गया था, जहां दूर-दराज से पहुंची बहनें अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं। जेल प्रशासन द्वारा बहनों और भाइयों को बारी-बारी से मुलाकात के लिए अंदर भेजा जा रहा था। बहनों को अपने साथ राखी और मिठाई ले जाने की अनुमति भी दी गई। पूरे आयोजन के दौरान जेल प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करते नजर आए, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो और बहनों को अपने भाइयों से सहजता से मिलकर रक्षाबंधन मनाने का अवसर मिल सके।
राखी बांधने के बाद नम हुईं आंखें
जेल के भीतर भाइयों की कलाई पर राखी बांधने और मिठाई खिलाने के बाद जब बहनें बाहर निकलीं तो कई बहनों की आंखों में आंसू साफ दिखाई दिए। भाई से कुछ देर की मुलाकात, राखी बांधने का भावुक क्षण और फिर उसी भाई को जेल की चारदीवारी के भीतर छोड़कर बाहर निकलना उनके लिए आसान नहीं था। कई बहनें भावुक नजर आईं। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भी संवेदनशील कर गया।
रक्षाबंधन के इस आयोजन में एक तरफ जहां बहनों के चेहरे पर अपने भाइयों से मिलने की खुशी थी, वहीं दूसरी ओर मुलाकात खत्म होने के बाद बिछड़ने का दर्द भी साफ दिखाई दिया। जेल प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्था ने इस भावुक पल को और सहज बना दिया। आमतौर पर जेल की पहचान अनुशासन और बंदिशों से होती है, लेकिन इस दिन परिसर में भाई-बहन के रिश्ते का अपनापन और मानवीय संवेदनाएं प्रमुखता से दिखाई दीं।
155 पुरुष और 11 महिला बंदी निरुद्ध
जिला जेल कोरिया में वर्तमान में 155 पुरुष और 11 महिला बंदी निरुद्ध हैं। इनमें दो सजायाफ्ता कैदी भी शामिल हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं बहनों के लिए की गई विशेष व्यवस्था महत्वपूर्ण रही। जेल प्रशासन ने त्योहार के दौरान मुलाकात की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखते हुए बहनों को भाइयों के साथ कुछ समय बिताने और राखी बांधने का अवसर दिया।
बंदिशों के बीच रिश्तों की डोर हुई मजबूत
रक्षाबंधन का यह आयोजन केवल एक त्योहार मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक डोर कमजोर नहीं पड़ती। जेल की ऊंची दीवारों और बंद दरवाजों के बीच जब भाइयों की कलाई पर बहनों ने राखी बांधी तो वहां रिश्तों का अपनापन साफ महसूस हुआ।
राखी बांधने के बाद बहनों की नम आंखें इस बात की गवाही दे रही थीं कि उनके लिए यह मुलाकात कितनी महत्वपूर्ण थी। जिला जेल कोरिया में पहली बार रक्षाबंधन पर की गई इस विशेष पहल ने निरुद्ध बंदियों को भी अपने परिवार से जुड़ने और त्योहार की खुशियों में शामिल होने का अवसर दिया। जेल प्रशासन की संवेदनशील पहल से भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार का संदेश जेल की चारदीवारी के भीतर भी प्रेम, विश्वास और रिश्तों की मजबूती के रूप में दिखाई दिया।








