भरतपुर/एमसीबी। जिले के भरतपुर विकासखंड के ग्राम मसर्रा में लगातार बारिश के बीच करीब 40 साल पुराना अमाकुंडी बांध 22 अगस्त की देर रात अचानक फूट गया। बांध के टूटने से बड़ी मात्रा में पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे दर्जनों किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल प्रभावित होकर बर्बाद हो गई। अचानक आई इस आपदा से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। बांध टूटने की खबर के बाद ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी का माहौल है।
गांव के शिवराम, रामचंद, कैलाश, बक्शा राम, छोटेलाल, रामदास, पारसनाथ, विष्णु यादव और यादराम ने बताया कि अमाकुंडी बांध का निर्माण अविभाजित मध्यप्रदेश के समय जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया था। लगभग चार दशक पुराने इस बांध की स्थिति और इसकी सुरक्षा को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही थी। बारिश के कारण बांध में पानी का दबाव बढ़ता गया और 22 अगस्त की रात बांध का एक हिस्सा अचानक टूट गया। बांध से निकले पानी ने आसपास के खेतों को अपनी चपेट में ले लिया।
खड़ी फसल पर टूटा पानी का कहर
बांध टूटने का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। जिन खेतों में किसान मेहनत कर धान की फसल तैयार कर रहे थे, वहां अचानक पानी भर गया। कई खेतों में धान की खड़ी फसल पानी में डूब गई, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बहाव के कारण फसल के साथ मिट्टी को भी नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है। किसानों का कहना है कि फसल खराब होने से इस साल की पूरी मेहनत और लागत पर पानी फिर गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक बांध टूटने की घटना रात में हुई, जिसके कारण आसपास के लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति भी बनी। लगातार बारिश के बीच बांध से पानी निकलने के बाद खेतों में जलभराव बढ़ गया। हालांकि घटना में किसी बड़ी जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन फसल के नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
चार दशक पुराने बांध की सुरक्षा पर सवाल
अमाकुंडी बांध के टूटने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसकी देखरेख और रखरखाव को लेकर उठ रहा है। करीब 40 साल पुराने इस बांध की समय-समय पर जांच और मरम्मत किस स्तर पर हुई, बारिश से पहले इसकी स्थिति का निरीक्षण किया गया था या नहीं और बांध की जलभराव क्षमता के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था क्या थी, इन सवालों के जवाब अब ग्रामीण मांग रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध की स्थिति का समय रहते आकलन किया जाता और आवश्यक मरम्मत कराई जाती तो संभवतः ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था। अब बांध टूटने के कारण किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें राहत उपलब्ध कराना जरूरी है।
नुकसान का सर्वे और मुआवजे की मांग
बांध टूटने से प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन किसानों की धान की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही बांध के टूटे हिस्से की जांच कराकर भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग और प्रशासन से बांध की मौजूदा स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराने की भी मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बांध किस कारण से टूटा। लगातार बारिश को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और जल निकासी की स्थिति पर भी नजर रखने की जरूरत है।
अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर
अमाकुंडी बांध टूटने की घटना ने जहां किसानों की तैयार फसल को नुकसान पहुंचाया है, वहीं करीब चार दशक पुराने जल संसाधन ढांचे के रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन प्रभावित किसानों के नुकसान का कितनी जल्दी सर्वे कराता है और उन्हें राहत व मुआवजा दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है। साथ ही बांध टूटने के वास्तविक कारणों की जांच होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।




