बैकुण्ठपुर नगर पालिका चुनाव: भाजपा में अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की लंबी कतार, नए चेहरे की एंट्री ने बढ़ाई सियासी हलचल, शैलेश शिवहरे से लेकर भानु पाल, अनिल खटीक, पंकज गुप्ता, शारदा प्रसाद गुप्ता तक कई नाम चर्चा में, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रशांत गुप्ता के सोशल मीडिया पोस्ट ने तेज की राजनीतिक अटकलें

Chandrakant Pargir

 


बैकुण्ठपुर। आगामी दिसंबर 2026 में प्रस्तावित नगर पालिका चुनाव को लेकर बैकुण्ठपुर की राजनीति गर्माने लगी है। सामान्य वर्ग के लिए संभावित अध्यक्ष पद को लेकर भारतीय जनता पार्टी में दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि पार्टी ने अभी तक अपने अधिकृत प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन संगठन और राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि इस बार एक नए चेहरे की संभावित दावेदारी ने पूरे शहर में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैकुण्ठपुर नगर पालिका में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती योग्य और सर्वस्वीकार्य प्रत्याशी के चयन की होगी। यही कारण है कि संगठन विभिन्न नामों पर मंथन करता दिखाई दे रहा है।


शैलेश शिवहरे सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल

भाजपा के संभावित दावेदारों में सबसे पहला नाम पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष नविता शिवहरे के पति शैलेश शिवहरे का माना जा रहा है। नगर पालिका में उनका लंबा अनुभव रहा है। वर्तमान परिषद के पांच वर्षीय कार्यकाल में लगभग दो वर्ष कांग्रेस सरकार तथा शेष अवधि भाजपा सरकार के दौरान रही। संगठन और स्थानीय राजनीति में उनकी सक्रियता उन्हें मजबूत दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।


भानु पाल भी अध्यक्ष पद की दौड़ में

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कई बार के पार्षद रहे भानु पाल भी इस बार अध्यक्ष पद के लिए पूरी तैयारी में बताए जा रहे हैं। लंबे समय से संगठन और नगर की राजनीति में सक्रिय रहने वाले भानु पाल को जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचान मिली है। पार्टी के भीतर भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।


अनिल खटीक की सक्रियता भी चर्चा में

वर्तमान भाजपा मंडल अध्यक्ष अनिल खटीक का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है। सामाजिक गतिविधियों, गौ सेवा और आम लोगों के बीच लगातार सक्रिय रहने के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक हलकों में उन्हें प्रदेश के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।


पंकज गुप्ता ने भी बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता

भाजपा के महामंत्री पंकज गुप्ता ने भी पिछले कुछ समय से अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सामान्य सीट होने के कारण उनकी दावेदारी भी चर्चा में है। बैकुण्ठपुर में भाजपा की संगठनात्मक नींव रखने वाले परिवार से जुड़े होने के कारण संगठन में उनकी अच्छी पकड़ और सकारात्मक छवि मानी जाती है।


शारदा प्रसाद गुप्ता का नाम भी प्रमुख दावेदारों में

बैकुण्ठपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एवं भाजपा जिला मंत्री युवा शारदा प्रसाद गुप्ता भी अध्यक्ष पद के संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताए जा रहे हैं। व्यापारिक वर्ग के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने और रचनात्मक कार्यों के लिए पहचान रखने वाले शारदा प्रसाद गुप्ता को भी पार्टी के भीतर गंभीर दावेदार माना जा रहा है।



प्रशांत गुप्ता की एंट्री ने बढ़ाई सियासी हलचल

इन सभी नामों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं संगठन के विभिन्न पदों पर रह चुके स्वर्गीय रामधनी गुप्ता के पुत्र तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रशांत गुप्ता का नाम अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। हाल ही में उन्होंने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा—

"ज़िंदगी में कुछ फैसले अपने लिए लिए जाते हैं, और कुछ समाज के लिए... जो शायद मेरी पहचान नहीं, मेरे उद्देश्य को नई दिशा देगा।"

इस पोस्ट के सामने आते ही बैकुण्ठपुर की राजनीति में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया। सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने इसे नगर पालिका चुनाव लड़ने के संकेत के रूप में देखा और उन्हें अग्रिम बधाइयाँ तक देना शुरू कर दिया। हालांकि प्रशांत गुप्ता या भाजपा संगठन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।


टिकट चयन पर टिकी निगाहें

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा किसी नए और युवा चेहरे पर दांव खेलती है, तो चुनावी मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। वहीं यदि संगठन अनुभवी नेताओं में से किसी एक को मौका देता है, तो उसके अपने राजनीतिक समीकरण होंगे। फिलहाल पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन दावेदारों की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि टिकट की दौड़ तेज हो चुकी है।


कांग्रेस की रणनीति भी होगी अहम

नगर पालिका बैकुण्ठपुर में अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा के भीतर बढ़ती हलचल के बीच कांग्रेस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा जिस चेहरे पर अंतिम मुहर लगाएगी, उसी के आधार पर कांग्रेस अपनी रणनीति तय करेगी। यदि भाजपा किसी मजबूत और व्यापक स्वीकार्यता वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो मुकाबला काफी दिलचस्प और कांटे का होने की संभावना जताई जा रही है।

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