बैकुण्ठपुर, 4 अगस्त। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के विशेष न्यायालय, बैकुण्ठपुर के विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक ने आदिवासी युवती से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। विशेष आपराधिक प्रकरण क्रमांक 03/2026 में न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी नामेन्द्र दास को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्ध पाया।
अभियोजन के अनुसार 28 नवंबर 2025 की रात लगभग 11 बजे बैकुण्ठपुर के जूनापारा स्थित एक किराए के मकान में, जहां पीड़िता निवास करती थी, आरोपी ने जबरन प्रवेश कर गृह अतिचार किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। अभियोजन ने यह भी बताया कि आरोपी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य नहीं है, जबकि पीड़िता अनुसूचित जनजाति (गोंड़) समुदाय से संबंधित है। घटना के बाद पीड़िता की शिकायत पर थाना अजाक बैकुण्ठपुर में प्रधान आरक्षक कीर्ति तिवारी द्वारा अपराध क्रमांक 12/25 दर्ज कर विवेचना की गई।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 331(4) के तहत 5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 64(1) के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं 3,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। न्यायालय के इस फैसले को अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला के साथ हुए गंभीर अपराध के मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

