बैकुंठपुर। कोरिया वन मंडल के विभिन्न वन क्षेत्रों में वनभूमि पर अतिक्रमण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। वन क्षेत्रों में अतिक्रमण कर जहां अरहर और उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुआई की जा रही है, वहीं कई स्थानों पर वनभूमि को खेत में तब्दील कर धान की खेती भी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद वन विभाग का मैदानी अमला इस ओर प्रभावी कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। इससे वनभूमि पर अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद होने और जंगलों के संरक्षण को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कोरिया वन मंडल के लगभग सभी वन परिक्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर वनभूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। सबसे गंभीर स्थिति बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र के टेमरी बिट में बताई जा रही है। यहां गोबरी पुल के नीचे करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित सागौन प्लांटेशन में अतिक्रमण किए जाने का आरोप है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, अतिक्रमणकारियों द्वारा प्लांटेशन क्षेत्र में लगे सागौन के पेड़ों की कथित रूप से कटाई कर जमीन को कृषि भूमि में तब्दील कर दिया गया है। इसके बाद खाली किए गए हिस्से में उड़द और अरहर की फसल बोने के साथ-साथ कुछ हिस्सों में धान की खेती भी किए जाने की बात कही जा रही है।
प्लांटेशन की जमीन पर खेती, विभाग की निगरानी पर सवाल
वन क्षेत्र में लगाए गए प्लांटेशन का उद्देश्य भविष्य में वन संपदा को बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण करना होता है। ऐसे में यदि प्लांटेशन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई कर कृषि कार्य किया जा रहा है तो यह वन संरक्षण के लिहाज से गंभीर मामला है। सवाल यह भी उठता है कि इतने बड़े क्षेत्र में अतिक्रमण और कथित रूप से पेड़ों की कटाई के बावजूद वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। यदि विभाग को इसकी जानकारी थी, तो समय रहते अतिक्रमण हटाने और पेड़ों की कटाई रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी पर भी उठ रहे सवाल
वन क्षेत्रों की सुरक्षा और अवैध कटाई रोकने के लिए वन विभाग द्वारा बीट गार्ड से लेकर वनरक्षक, डिप्टी रेंजर और रेंजर स्तर तक अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इसके बावजूद यदि वनभूमि पर लगातार खेती का विस्तार हो रहा है और प्लांटेशन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई कर फसल बोई जा रही है, तो यह विभागीय निगरानी व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जांच और सीमांकन की मांग
टेमरी बिट के गोबरी पुल के नीचे स्थित सागौन प्लांटेशन में कथित अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई के मामले की विभागीय स्तर पर तत्काल जांच की आवश्यकता है। वन विभाग को मौके का भौतिक सत्यापन कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने क्षेत्र में अतिक्रमण हुआ है, कितने पेड़ काटे गए हैं और वर्तमान में कितनी वनभूमि पर कृषि की जा रही है। साथ ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए वनभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग भी उठ रही है।
यदि वन विभाग के अधिकारियों को इस मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई है, तो यह भी जांच का विषय है कि आखिर किसके संरक्षण में वनभूमि पर अतिक्रमण का यह खेल चल रहा है। अब देखना होगा कि वन मंडल के आला अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके की जांच कराते हैं या फिर वनभूमि पर अतिक्रमण और प्लांटेशन की जमीन पर खेती का सिलसिला इसी तरह जारी रहता है।




