बैकुंठपुर। कोरिया जिले की सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बना हुआ है। सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण आए दिन वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई बार मवेशी वाहनों की चपेट में आकर घायल या मौत का शिकार भी हो जाते हैं। समस्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा सड़कों से मवेशियों को हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं और इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। हालांकि, अब इस अभियान को लेकर एक नया सवाल खड़ा हो गया है कि सड़कों से मवेशियों को हटाकर गोठानों में पहुंचाने के बाद उनके चारे और देखभाल की व्यवस्था कौन करेगा?
बैकुंठपुर शहर से लगे चेरवापारा गोठान में सड़कों से उठाकर बड़ी संख्या में मवेशियों को रखा गया है। गौ सेवक अनुराग दुबे ने मौके का निरीक्षण करने के बाद आरोप लगाया कि गोठान में रखे गए गौवंशों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि कई मवेशी पिछले तीन दिनों से भूखे हैं और फिलहाल उनके लिए केवल पानी की व्यवस्था दिखाई दे रही है। अनुराग दुबे के अनुसार, सड़कों से मवेशियों को पकड़कर गोठान में रखने से पहले उनके चारे और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में भूख से परेशान मवेशियों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और यदि समय रहते चारे की व्यवस्था नहीं की गई तो किसी गौवंश की मौत होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सड़कों पर घायल गौवंशों की सुध लेने वाले गिने-चुने लोग
एक तरफ प्रशासन द्वारा सड़कों से मवेशियों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गौवंशों के उपचार और बचाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर गौ सेवक अनुराग दुबे, अनिल खटीक और रिचेश सिंह जैसे कुछ ही लोग घायल मवेशियों की मदद के लिए मौके पर दिखाई दे रहे हैं।
मुख्तार ने बचाई जान
हाल ही में रामपुर मस्जिद के पास एक घायल गौवंश सड़क किनारे पड़ा मिला। मेकेनिक मुख्तार की नजर जब उस पर पड़ी तो उन्होंने इसकी जानकारी स्थानीय पार्षद अनिल खटीक को दी। पार्षद द्वारा पशु विभाग के चिकित्सकों को सूचना दी गई, जिसके बाद देर रात करीब 12 बजे तक चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और घायल गौवंश का उपचार किया। बताया जा रहा है कि उपचार के बाद उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर है। इस दौरान मेकेनिक मुख्तार भी मौके पर मौजूद रहे और घायल गौवंश के इलाज में सहयोग किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़कों से मवेशियों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है तो इसके साथ ही घायल और बीमार गौवंशों के उपचार तथा उनके सुरक्षित पुनर्वास की भी व्यवस्था होनी चाहिए। केवल मवेशियों को पकड़कर किसी गोठान में छोड़ देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
मुख्यमंत्री के आगमन के समय भी उठे थे सवा
गौवंशों को गोठान में पहुंचाने के बाद उनके चारे की व्यवस्था नहीं होने का मामला नया नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में भाड़ी ग्राम पंचायत द्वारा संचालित गोठान में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन बैकुंठपुर जनपद पंचायत सीईओ द्वारा मुख्यमंत्री के आगमन के समय सड़कों और आसपास के क्षेत्रों से मवेशियों को पकड़कर गोठान में रखवाया गया था। हालांकि, उस समय भी मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई थी।
अब चेरवापारा गोठान में सड़कों से हटाकर रखे गए गौवंशों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं होने के आरोप के बाद प्रशासन के अभियान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब सड़कों से मवेशियों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है तो क्या संबंधित अधिकारियों ने पहले से यह सुनिश्चित किया है कि गोठानों में पहुंचाए जाने वाले मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा, पानी, शेड और उपचार की व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं?
सड़क से गोठान तक पहुंचाने के बाद कौन करेगा देखभाल?
सड़कों पर मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना जरूरी है, लेकिन इसके लिए चलाए जा रहे अभियान में मवेशियों की सुरक्षा और उनके भोजन की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि मवेशियों को सड़कों से हटाकर गोठानों में तो पहुंचा दिया जाए, लेकिन वहां उनके चारे की व्यवस्था न हो तो अभियान का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
स्थानीय लोगों और गौ सेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि चेरवापारा गोठान का तत्काल निरीक्षण कर वहां रखे गए सभी गौवंशों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था की जाए। साथ ही सड़कों पर घायल पड़े मवेशियों के उपचार के लिए पशु चिकित्सा विभाग की टीम को सक्रिय किया जाए और सड़क से मवेशियों को हटाने के साथ-साथ उनके सुरक्षित पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि अभियान केवल कागजों और आंकड़ों तक सीमित न रह जाए।






