बैकुंठपुर। पशुपालन विभाग में मानदेय भुगतान में अनियमितता, भ्रष्टाचार और कथित रिश्वतखोरी से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए रायपुर से गठित पांच सदस्यीय जांच समिति शुक्रवार को जिला मुख्यालय बैकुंठपुर पहुंची। संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं, नवा रायपुर द्वारा गठित इस समिति को विभिन्न शिकायतों की जांच कर सात दिनों के भीतर तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का दायित्व सौंपा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सलका निवासी कृष्ण विभूति तिवारी द्वारा जिला कोरिया में पशुपालन विभाग में कथित घोटाले संबंधी शिकायत की गई थी। इसके साथ ही विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की कतरनें भी विभाग को भेजी गई थीं। वहीं बैकुंठपुर निवासी दिलीप पाण्डेय ने कृत्रिम गर्भाधान कार्य के मानदेय भुगतान के नाम पर उप संचालक एवं शाखा प्रभारी द्वारा 20 प्रतिशत राशि रिश्वत के रूप में मांगे जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके अलावा पीएआईडब्ल्यू (PAIW) कार्यकर्ता विकास कुमार साहू ने भी मानदेय भुगतान में अनियमितता, भ्रष्टाचार, स्वेच्छाचारिता तथा अन्य प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर कई शिकायतें विभाग एवं मंत्री कार्यालय को भेजी थीं। इन सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संचालनालय ने संयुक्त जांच के आदेश जारी किए थे।
जांच समिति में पशु चिकित्सा संचालनालय की डॉ. रोहिणी पाठक, डॉ. संध्या शर्मा, सहायक लेखा अधिकारी योगिता कोसिमा, सहायक ग्रेड-1 अजय कुमार नामदेव तथा सहायक ग्रेड-2 आकाश दास को शामिल किया गया है। समिति को शिकायतों के प्रत्येक बिंदु की जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला मुख्यालय पहुंची जांच टीम ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जानकारी जुटाई। हालांकि जांच के संबंध में मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर समिति के सदस्यों ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस दौरान शिकायतकर्ताओं को भी फोन कर कार्यालय बुलाया गया।
शिकायतकर्ता विकास कुमार साहू का आरोप है कि उन्हें जांच प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, लेकिन प्रतिवेदन की सामग्री अथवा निष्कर्ष नहीं दिखाए गए। शिकायतकर्ताओं ने बिना प्रतिवेदन देखे किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक जांच रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी जाएगी, तब तक वे किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। वही शिकायतकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट दिलीप पांडेय का कहना है कि कृत्रिम गर्भधान के भुगतान के मामले में जो जानकारी मुझे मिली थी उसमे करोड़ो का घोटाला हुआ है मुझे उम्मीद है मामले में जांच के बाद कार्यवाही होगी।
सूत्रों के अनुसार जांच दल कुछ घंटों तक बैकुंठपुर में रहकर आवश्यक जानकारी एकत्रित करने के बाद रायपुर लौट गया। वहीं शिकायतकर्ताओं ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। अब सभी की नजरें संचालनालय को प्रस्तुत की जाने वाली जांच समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली संभावित विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



