नालंदा परिसर निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, नींव से ही गुणवत्ता पर संदेह

Chandrakant Pargir

 


कोरिया। बैकुंठपुर शहर के बीचोबीच बन रहे नालंदा परिसर के निर्माण कार्य ने शुरुआती चरण में ही विवाद खड़ा कर दिया है। नींव की खुदाई पूरी होने के बाद अब भारी भरकम स्ट्रक्चर खड़ा करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। निर्माण का ठेका बाहर के ठेकेदार को दिया गया था, जबकि मौके पर पीटी कॉन्ट्रेक्टर द्वारा काम किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।



निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों का कहना है कि भारी बीम खड़ा करते समय सामान्यतः 12 से 16 मिमी के स्टिरप (बॉक्स) का उपयोग अनिवार्य होता है, लेकिन मौके पर ऐसा कोई बॉक्स स्ट्रक्चर नजर नहीं आ रहा है। इतना ही नहीं, जहां बीम के नीचे मजबूत आरसीसी कंक्रीट की पर्याप्त मोटाई और क्यूब संरचना बनाई जानी चाहिए, वहां केवल करीब 40 मिमी की पतली लेयर डालकर काम चलाया जा रहा है। यह तकनीकी मानकों की अनदेखी को दर्शाता है और भविष्य में भवन की मजबूती पर गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।



करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस भवन की तकनीकी निगरानी पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। सिविल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े निर्माण में नींव सबसे महत्वपूर्ण होती है और यदि शुरुआत में ही लापरवाही बरती गई, तो पूरा ढांचा कमजोर हो सकता है। इसके बावजूद मौके पर न तो सख्त मॉनिटरिंग नजर आ रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारी सक्रिय दिख रहे हैं।



गौरतलब है कि कोरिया जिला में इससे पहले भी कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए गए जमगहना स्कूल भवन और बचरा पोड़ी तहसील भवन में निर्माण के कुछ ही समय बाद बड़ी दरारें सामने आई थीं, लेकिन इन मामलों में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में नालंदा परिसर का निर्माण भी उसी राह पर जाता दिख रहा है।



स्थानीय लोगों और जानकारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

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