लखनऊ पुस्तक मेले में “अफसाना लिख रहा हूँ” का विमोचन, सिनेमा के 150 साल की यात्रा पर केंद्रित किताब

Chandrakant Pargir

 


लखनऊ। लखनऊ पुस्तक मेले में वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार डॉ. मनीष शुक्ल और डॉ. राखी बख्शी के संपादन में तैयार पुस्तक “अफसाना लिख रहा हूँ” का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री व विधायक अनुपमा जायसवाल ने कहा कि यह पुस्तक फिल्मों का ऐसा दस्तावेज है, जो पाठकों को सीधे तौर पर सिनेमा से जोड़ती है।



विशिष्ट अतिथि विभा सिंह (उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी) ने कहा कि पुस्तक में डॉ. शिल्पी शुक्ला बख्शी के लेखों के माध्यम से फिल्मों में नारी सशक्तिकरण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। मुख्य वक्ता गिरीश चंद्र मिश्र (उपाध्यक्ष, राज्य ललित कला अकादमी) ने कहा कि यह पुस्तक फिल्म इतिहास को संजोने के साथ-साथ भविष्य की दिशा भी बताती है।



पुस्तक के संपादक डॉ. मनीष शुक्ल ने बताया कि इसमें देशभर के 13 विशेषज्ञों के लेख शामिल हैं, जिनमें दादा साहब फाल्के के दौर से लेकर ओटीटी युग तक के सिनेमा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।



कार्यक्रम में राधा पांडेय (राष्ट्रीय मंत्री, भारत-तिब्बत सहयोग मंच महिला शाखा) ने कहा कि यह पुस्तक फिल्मों के विभिन्न आयामों को दर्शाती है। अध्यक्षता कर रहे सौरभ मालवीय (अध्यक्ष, हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने कहा कि फिल्में समाज का दर्पण होती हैं और यह पुस्तक सवा सौ वर्षों की फिल्मी यात्रा को समझने का अवसर देती है।



वरिष्ठ पत्रकार व फिल्म समीक्षक श्रीधर अग्निहोत्री ने कहा कि यह पुस्तक जहां चमकते सितारों की कहानी कहती है, वहीं गुमनाम कलाकारों के योगदान को भी सामने लाती है। अंत में संपादक डॉ. राखी बख्शी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद के बिना फिल्मों की कहानी अधूरी है और ऐसी फिल्मों ने समय-समय पर देश को एकजुट किया है।

कार्यक्रम में चंद्रभूषण सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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