रायपुर। छत्तीसगढ़ में कार्यरत दैनिक श्रमिकों के स्थाईकरण की मांग तेज हो गई है। दैनिक श्रमिक मोर्चा के प्रांत सचिव एचएस तिवारी ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, विधि-विधायी मंत्री तथा किरण सिंह देव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर एक वर्ष से कार्यरत सभी दैनिक श्रमिकों का स्थाईकरण करने की मांग की है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 व 2023 में औद्योगिक कानूनों के तहत स्थाईकरण योजनाएं लागू की गईं, जबकि राजस्थान में भी संविदा व दैनिक कर्मियों के लिए समय सीमा तय कर स्थाईकरण किया गया है।
ज्ञापन में बताया गया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2023 के फैसले में बिना रिक्त पद या औपचारिक नियुक्ति आदेश के कार्यरत दैनिक श्रमिकों के स्थाईकरण के पक्ष में टिप्पणी की थी। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ में भी “माता कौशल्या स्थाईकरण योजना” लागू कर लगभग 36 हजार दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों व हजारों संविदा कर्मियों को लाभ देने की मांग उठाई गई है।
तिवारी ने कहा कि अप्रैल 2026 से नई श्रम संहिताएं लागू होने के बाद पुराने औद्योगिक कानूनों का प्रभाव कम हो सकता है, जिससे स्थाईकरण योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। इसलिए समय रहते राज्य सरकार को निर्णय लेना चाहिए। साथ ही अनियमित कर्मचारियों से संबंधित समिति में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग रखी गई है।
इस मुद्दे पर प्रांत प्रवक्ता सत्यम शुक्ला ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले ओपी चौधरी द्वारा अन्य राज्यों की स्थाईकरण योजनाओं की सराहना का वीडियो काफी चर्चा में रहा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर दैनिक श्रमिकों की लंबे समय से लंबित मांग पूरी करेगी।
वहीं दैनिक श्रमिक मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो श्रमिक आंदोलन को तेज किया जाएगा।

