रेफर के चक्कर में गई जान, पत्नी का निजी अस्पताल में इलाज जारी, तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे दंपत्ति, सड़क हादसे के बाद इलाज में देरी बनी मौत की वजह

Chandrakant Pargir

 


बैकुंठपुर। कोरिया जिले के डुमरिया के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे और उसके बाद इलाज में हुई कथित लापरवाही ने एक परिवार को गहरा जख्म दे दिया। बैकुंठपुर जनपद के झरनापारा निवासी 40 वर्षीय मोतीलाल विश्वकर्मा अपनी पत्नी के साथ चाचा की तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे। उनके पीछे दूसरी बाइक पर उनका भाई भी चल रहा था। दोपहर करीब 1 बजे शिवानी ढाबा के पास सूरजपुर की ओर से आ रही एक कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार ने बाइक सवार दंपत्ति को कुचलते हुए कुछ दूर तक घसीटा।




हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पीछे आ रहे मृतक के भाई ने दोनों घायलों को संभाला। परिजनों का आरोप है कि मौके पर मौजूद लोगों ने समय रहते 108 एंबुलेंस को कॉल नहीं किया। एक राहगीर कार चालक की मदद से दोनों को पटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां करीब 1:30 बजे उन्हें भर्ती किया गया। परिजनों का कहना है कि दोनों की हालत गंभीर थी, इसके बावजूद तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने में देरी की गई। अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजे जाने के बजाय उन्हें बैकुंठपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया।




करीब 3 बजे बैकुंठपुर पहुंचने तक मोतीलाल बात कर रहे थे, लेकिन अंदरूनी चोटों की समुचित जांच नहीं की गई। उन्हें फिर से रेफर करने की तैयारी के दौरान ही उनकी सांसें थम गईं। वहीं उनकी पत्नी, जिनके दोनों पैर टूट गए थे और जो बेहोश थीं, उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। वही कार का ड्राइवर ठोकर मारने के बाद बेहोश होने का नाटक करने लगा बाद में उसे पुलिस थाना ले जाया गया।




परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज और संवेदनशीलता दिखाई जाती, तो शायद जान बच सकती थी। यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए असहनीय क्षति है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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